- डेढ़ महीने से नलों में आ रहा है ‘ज़हर’
- फतहनगर की नानेश और महेश कॉलोनी में गंदे-बदबूदार पानी की सप्लाई से हाहाकार
- 45 दिन बाद भी प्रशासन कुंभकर्णी नींद में!
सीनियर रिपोर्टर-श्रीमती भगवती जोशी
फतहनगर/उदयपुर, 27 जून। राजस्थान में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार होने के बड़े-बड़े दावों के बीच, उदयपुर जिले के फतहनगर पालिका क्षेत्र से रोंगटे खड़े कर देने वाली प्रशासनिक लापरवाही सामने आ रही है। रेलवे स्टेशन के पीछे स्थित नानेश कॉलोनी, महेश कॉलोनी, हीरावास रोड और आसपास के इलाकों में पिछले करीब डेढ़ महीने (45 दिनों) से लगातार गंदे, मटमैले और बदबूदार पानी की सप्लाई की जा रही है।
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स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पानी इतना दूषित है कि उसे देखना भी दूभर है, पीना तो दूर की बात है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर स्थानीय जनता द्वारा नगर पालिका प्रशासन और जलदाय विभाग को समय-समय पर अवगत कराया गया। इसके बावजूद, डेढ़ महीने से जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद सो रहे हैं।
क्या इंदौर के ‘भागीरथपुरा’ जैसी 22 मौतों का इंतज़ार है?
फतहनगर की यह स्थिति ठीक वैसी ही भयावह लापरवाही की याद दिलाती है, जो मई-जून 2024 में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में देखने को मिली थी।
क्या हुआ था इंदौर में?
इंदौर में प्रशासनिक अनदेखी के कारण पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही थी। पाइपलाइन में लीकेज की वजह से सीवेज (गंदे नाले और शौचालय का पानी) पीने के पानी में मिल गया।
जानलेवा बैक्टीरिया: जब उस पानी की जांच हुई, तो उसमें ई-कोलाई (E. coli) और हैजा (Cholera) फैलाने वाले बेहद खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए।
22 मौतें और 2500 बीमार:
उस दूषित पानी को पीने से पूरे इलाके में डायरिया की महामारी फैल गई थी। देखते ही देखते 22 से अधिक बेकसूर लोगों की तड़प-तड़प कर जान चली गई और 2,500 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए थे, जिनमें से सैकड़ों को महीनों तक अस्पताल के ICU बेड पर जिंदगी की जंग लड़नी पड़ी थी।
कम दबाव ने बढ़ाई आशंका: पाइपलाइन में सीवेज मिलने का डर
फतहनगर के स्थानीय महिलाओं ने बताया कि नलों में पानी बेहद कम दबाव (लो प्रेशर) से आ रहा है। कम दबाव के कारण जमीन के अंदर मौजूद गंदगी और नालियों का गंदा पानी लीकेज के रास्ते पेयजल आपूर्ति में खिंचा चला आ रहा है।
इलाके के लोग अब कौड़ी-कौड़ी देकर पानी के टैंकर मंगाने और वैकल्पिक व्यवस्था करने को मजबूर हैं। गरीब बस्तियों के लोग मजबूरन इसी जहरीले पानी को उबालकर पीने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में पेट की बीमारियां फैलने लगी हैं।
जनता का बड़ा सवाल: क्या डेढ़ महीने बाद भी प्रशासन पाइपलाइन में लीक नहीं ढूंढ पाया
क्षेत्रवासियों ने नगर पालिका प्रशासन और जलदाय विभाग के उच्चाधिकारियों को चेतावनी दी है कि फतहनगर की जनता को इंदौर के भागीरथपुरा जैसा ‘बलि का बकरा’ न बनाया जाए। अगर समय रहते पूरी पाइपलाइन की मुस्तैदी से जांच नहीं की गई और गंदे पानी की सप्लाई तुरंत बंद नहीं हुई, तो यहाँ भी इंदौर जैसी भीषण महामारी फैल सकती है।
बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ और स्थानीय प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी? क्या सरकार किसी बड़ी त्रासदी और लाशें उठने का इंतजार कर रही है, या फतहनगर के नागरिकों को साफ पानी का अधिकार मिलेगा?
