सनवाड l भारत तभी सशक्त और समृद्ध बनेगा जब उसकी नारी शिक्षित, संस्कारित और आर्थिक रूप से सक्षम होगी। नारी केवल घर की सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की धुरी है। यह विचार प्रबुद्ध समाजसेवी श्रीमती भगवती जोशी ने मंगलवार को यहां आयोजित सप्तशक्ति संगम मातृ सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में कहीl
विद्या निकेतन उच्च प्राथमिक विद्यालय के सभागार में आयोजित “समृद्ध भारत में नारी की भूमिका” विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक माँ समाज की सबसे पहली शिक्षिका होती है। संस्कारित बालक ही आगे चलकर न्यायप्रिय, ईमानदार और कर्मठ नागरिक बनते हैं। इसलिए हर नारी का यह दायित्व है कि वह अपने बच्चों में नैतिक मूल्यों का संचार करे।
घरेलू महिलाओं के लिए मासिक भत्ता शुरू करे सरकार
समर्थ सेवा संस्थान की संस्थापक श्रीमती जोशी ने कहा कि महिलाएं पूरे दिन घर, खेत, पशुओं और परिवार की देखभाल में इतना समय लगाती हैं कि उनके पास आत्मनिर्भरता का अवसर नहीं बचता। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि महिलाओं के श्रम का उचित मूल्यांकन किया जाए और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए मासिक भत्ता योजना शुरू की जाए।
उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं गाँव-गाँव जाकर महिलाओं को साबुन, सर्फ और लिक्विड बनाने का प्रशिक्षण देती हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान अल्पकालिक लाभ के लिए महिलाओं को पैसे या वस्तुएँ देकर जो वादे किए जाते हैं, वे सशक्तिकरण नहीं, निर्भरता बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा सशक्तिकरण तभी होगा जब महिलाओं को उनके परिश्रम का वास्तविक प्रतिफल मिलेगा, न कि क्षणिक प्रलोभन।

श्रीमती जोशी ने विधवा, एकल नारी, परित्यक्ता और दिव्यांग महिलाओं के लिए चल रही योजनाओं की सराहना करते हुए यह भी कहा कि कई ऐसी महिलाएँ हैं जिनके पति जीवित हैं, परंतु नशे, बीमारी या बेरोज़गारी के कारण जिम्मेदारी नहीं निभा पाते। उन्होंने हालिया घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि एक माँ ने पति की बीमारी व बेरोजगारी के चलते अपने नवजात की गला दबाकर हत्या कर दीl

इन हालात को ध्यान में रखते हुए राज्य को चाहिए कि वह बहुत ही मुश्किल परिस्थितियों में अपने बच्चों का लालन पोषण कर रही महिलाओं का मासिक भत्ता शुरू करेंl
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती कांता देवी जैन (प्रबंध समिति सदस्य) ने की। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति हमारे समाज की आधारशिला है और उनका सशक्त होना ही राष्ट्र की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्रीमती बवली अग्रवाल (प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बिनोल) ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपनी क्षमताओं को पहचानें और समाज परिवर्तन की अग्रदूत बनें।
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