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चित्तौड़गढ़ के बीएलओ: चुनौतियों के बीच समर्पण और सफलता की अद्भुत मिसाल

विशेष संक्षिप्त गहन पुनरीक्षण 2026

जयपुर, 24 नवंबर। राजस्थान में चल रहा विशेष संक्षिप्त गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 न केवल आंकड़ों में बल्कि जज़्बे, जिम्मेदारी और समर्पण में भी नए मानक स्थापित कर रहा है। यह सफलता उन बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की है, जिन्होंने व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद कर्तव्य को सर्वोपरि रखा और राजस्थान को देश के अग्रणी राज्यों में स्थान दिलाया।

4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चल रहे इस अभियान में चित्तौड़गढ़ जिले के कई बीएलओ 22 नवंबर तक ही 100% ऑनलाइन अपडेट पूरा कर चुके हैं। यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवीन महाजन ने इन बीएलओ की निष्ठा को “अद्वितीय और अनुकरणीय” बताते हुए नागरिकों से भी सक्रिय सहयोग की अपील की है।

1. सुनीता सोनी — बीमारी के बावजूद 100% उपलब्धि हासिल करने वाली पहली बीएलओ

पद: शिक्षिका, रा.प्रा.वि. गाडरियावास
भाग सं.: 171

लंबे समय से स्त्री-स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हुए भी सुनीता सोनी ने SIR कार्य को प्राथमिकता में रखा और जिले की पहली महिला बीएलओ बनीं जिन्होंने समय से पहले 100% कार्य पूरा किया।
उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर संवाद बढ़ाया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ बेहतरीन टीमवर्क किया।

उनका मंत्र: रणनीति सही हो तो तनाव नहीं, सिर्फ उपलब्धि मिलती है।

2. सूरजमल धाकड़ — दिव्यांगता नहीं, दृढ़ता ने बनाया रिकॉर्ड

पद: शिक्षक, रा.उ.प्रा.वि. मायरा
भाग सं.: 218

शारीरिक दिव्यांगता के बावजूद सूरजमल धाकड़ जिले के सबसे तेज़ और 100% उपलब्धि वाले बीएलओ में शामिल हुए। वे जिले के पहले दिव्यांग बीएलओ हैं जिन्होंने यह उपलब्धि दर्ज की।
90% से अधिक मैपिंग पहले ही कर लेने के कारण उनका कार्य और भी सटीक रहा।

उनका संदेश: “सीमाएँ शरीर की होती हैं, हौसले की नहीं।”

3. कोमल कटारिया — सिर्फ दो माह के अनुभव में शानदार प्रदर्शन

पद: शिक्षिका, रा.उ.प्रा.वि. सूरजपोल
भाग सं.: 93

सिर्फ दो महीनों के अनुभव के साथ बीएलओ बनीं कोमल कटारिया ने मेहनत, संवाद और सामुदायिक जुड़ाव से हर चुनौती को पार किया।
गाँव में सहयोग की कमी होने के बावजूद उन्होंने स्थानीय प्रभावी व्यक्तियों को साथ जोड़ा और समय से पहले लक्ष्य पूरा किया।

उनकी सीख: “नई भूमिका में भी जुनून पुरानी सीमाओं को तोड़ देता है।”

4. गोपाललाल शर्मा — दुर्घटना के दर्द के बीच कर्तव्य निभाने की मिसाल

पद: शिक्षक, रा.उ.प्रा.वि. रामाखेड़ा
भाग सं.: 19

हाल ही में दुर्घटना के कारण सिर और कमर दर्द झेलते हुए भी गोपाललाल शर्मा ने पूरी निष्ठा से SIR कार्य पूरा किया।
उन्होंने मतदाताओं के फोटो स्वयं जाकर लिए और संवाद-कौशल व अनुभव से सभी कार्य समय पर पूरे किए।

5. देवकीनंदन वैष्णव — शहरी चुनौतियों के बीच तेज़ और सटीक काम

पद: शिक्षक, रा.उ.प्रा.वि. कच्ची बस्ती
भाग सं.: 107

शहरी क्षेत्रों में मजदूरों, प्रवासियों और माइग्रेशन की समस्याएं सामान्य हैं, लेकिन देवकीनंदन ने इन कठिनाइयों को अवसर में बदला।
उन्होंने 955 मतदाता गणना पत्र 21 नवंबर तक ही पूरा कर दिया—स्काउटिंग अनुभव, रणनीति और फील्ड ज्ञान का बेहतरीन उपयोग करते हुए।

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चित्तौड़गढ़ के बीएलओ: समर्पण, साहस और सफलता की पहचान

बीमारी, दिव्यांगता, दर्द, अनुभव की कमी या जटिल क्षेत्र—चुनौतियाँ भले अलग थीं, लेकिन इन सभी बीएलओ में एक बात समान थी:

कर्तव्य के प्रति अतुलनीय समर्पण।

इन्हीं अधिकारियों के जज़्बे ने चित्तौड़गढ़ को राजस्थान के उत्कृष्ट जिलों में स्थान दिलाया और पूरे प्रदेश के लिए एक नई मिसाल कायम की।

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