Wednesday, February 11, 2026
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पिता को सिलिकोसिस बीमारी तो बेटा हुआ एक्सीडेंट से दिव्यांग…ईश्वर ऐसी मुश्किल में किसी को ना डालें

सीनियर रिपोर्टर- श्रीमती भगवती जोशी

मावली, 19 जनवरी l उदयपुर जिले के मावली उपखण्ड अंतर्गत गादोली ग्राम पंचायत के राजस्व गांव टीलोरा नया तालाब में एक परिवार गंभीर बीमारी, हादसे और आर्थिक तंगी के बीच संघर्ष कर रहा है। इस परिवार के दोनों कमाने वाले सदस्य आज असहाय हो चुके हैं, जिससे पूरा परिवार संकट में है।

बीमारी और हादसे ने छीनी परिवार की रोज़ी

परिवार के मुखिया भेरू सिंह गंभीर सिलिकोसिस (सिलिकॉन) बीमारी से ग्रसित हैं और लगातार ऑक्सीजन पर निर्भर हैं। बीमारी के कारण वे किसी भी प्रकार का श्रम कार्य करने में असमर्थ हैं। वहीं परिवार के बेटे का हाल ही में एक्सीडेंट हो गया, जिसके बाद वह भी काम करने की स्थिति में नहीं रहा। दोनों कमाने वालों के यूं एक साथ बीमार और घायल हो जाने से परिवार की आय पूरी तरह बंद हो चुकी है।

घर पर ऑक्सीजन, बढ़ा बिजली और इलाज का खर्च

सिलिकॉन बीमारी से पीड़ित भेरू सिंह को घर पर ही निजी इलेक्ट्रिशियन की ऑक्सीजन मशीन से सांस दी जा रही है, जिससे बिजली का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इलाज के लिए अस्पताल ले जाने पर निजी वाहन की व्यवस्था करनी पड़ती है और दवाइयां भी बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। हर दिन बढ़ते खर्च ने परिवार की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है।

इलाज के लिए पशु और गहने तक बेचने पड़े

बीमारी के लंबे इलाज और लगातार खर्चों के चलते परिवार को अपने पशु और बहू के गहने तक बेचने पड़े। इसके बावजूद भी इलाज और घर का खर्च ठीक से नहीं चल पा रहा है। खेती-बाड़ी से भी इतनी आमदनी नहीं हो पा रही कि परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें।

पोते के पोषण पर संकट, बहू मायके में रहने को मजबूर

सिलिकॉन बीमारी से पीड़ित भेरू सिंह का कहना है कि आर्थिक तंगी इतनी बढ़ चुकी है कि वे अपने पोते को दूध तक नहीं दिला पा रहे हैं। बच्चे के सही पोषण की चिंता के चलते उनकी बहू और पोता अधिकतर समय मायके में रहने को मजबूर हैं और कभी-कभी ही ससुराल आ पाते हैं।

₹3500 की पेंशन भी पड़ रही नाकाफी
परिवार को सरकार की ओर से कुल ₹3500 की मासिक पेंशन मिलती है, जिसमें वृद्धा पेंशन, विकलांग पेंशन और सिलिकोसिस से पीड़ित भेरू सिंह को उसकी फैक्ट्री से पेंशन मिलती हैl लेकिन यह राशि अस्पताल आने-जाने, दवाइयों, ऑक्सीजन मशीन की बिजली, मोबाइल और खाने-पीने के खर्चों में ही समाप्त हो जाती है। परिवार के लिए यह पेंशन राहत नहीं, बल्कि मजबूरी का सहारा बनकर रह गई है।

अस्थायी सहयोग मिला, स्थायी सहायता की जरूरत
परिवार का कहना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा एक-दो बार सहयोग जरूर मिला, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। भेरू सिंह भावुक होकर कहते हैं,
“कब तक हम दूसरों पर निर्भर रहेंगे? हम चाहते हैं कि हमें ऐसी सहायता मिले जिससे हमारा परिवार ठीक से जी सके और इलाज चलता रहे।”

प्रशासन और समाज से मदद की उम्मीद

परिवार ने प्रशासन और समाजसेवियों से अपील की है कि उनकी स्थिति को देखते हुए स्थायी आर्थिक सहायता और इलाज में सहयोग दिया जाए, ताकि इस संकट से उबरकर परिवार दोबारा सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।

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