- भक्तों, दर्शनार्थियों, संभागियों ने प्रसादी ग्रहण की
मावली, 24 जनवरीl मावली के निकटवर्ती गाँव लदानी में आदिकाल से ताकाश्याम की स्थापना की हुई।
प्राचीन श्री ताकाश्याम मंदिर उदयपुर- चित्तौड़गढ़ फोरलेन वाया कपासन वाली सड़क किनारे लदानी मुख्य गाँव से एक किमी दक्षिण दिशा में है।
लदानी के तालाब की पाल से आगे मंगरी की ऊंचाई पर श्री ताकाश्याम मंदिर बना हुआ है। पवित्र ग्रंथ महाभारत में नागों के राजा वासुकी का वर्णन किया गया है।
तक्षक नाग को कलयुग में ताकाश्याम के नाम से पूजा जाता हैं एवं भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो रही है।
मंदिर परिसर में पवित्र वृक्ष रूद्राक्ष, बिल्वपत्र, पारस पिपल, कल्पवृक्ष, वटवृक्ष, आशापाल आदि भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए सदा आतुर रहते हैं।
लदानी ताकाश्याम के प्रति शुक्रवार को भक्तों का मेला सा लगा रहता है।
वर्ष में दो बार जागरण रहता है। बसंत पंचमी को रात्रि जागरण एवं षष्ठी को विशेष दर्शन होते हैं।
रात्रि जागरण के समय भजन, किर्तन,गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि आयोजित होते हैं।
बसंत पंचमी शुक्रवार को भक्तों के आने का क्रम जारी रहा। रात्रि को बासनी कला की भजन मण्डली द्वारा भजनों की जड़ी लगा दी। मंदिर परिसर को फूल मालाओं एवं बिजली के डेकोरेशन से सजाया गया। दर्शकों, भक्तों, संभागियों ने भजनों का आनंद लिया।

लदानी ताकाश्याम दर्शन को सम्पूर्ण राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों के भक्त विशेष रूप से वर्ष में दो बार आतें है।
अपनी मन्नत पूर्ण होने/ मनोकामनाएं पूर्ण होने पर प्रसादी आयोजन, सराय निर्माण कार्य, सजावट कार्य, अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में अपना अहोभाग्य समझते हैं।
भक्तों के परिवारजनों के सदस्यों के झड़ूला, घोलविंटी आदि का आयोजन होने के साथ प्रसादी आयोजन होता है।
भक्त अपने साथ घर से ईच्छा अनुसार नारियल, धूप,अगरबत्ती, प्रसाद, फल, फूल, पक्षियों का दाना अनाज आदि श्रधा के साथ लेकर आते हैं। सम्पूर्ण प्रसाद, फल, मिठाई भक्तों, संभागियों में वितरण कर दी जाती हैं।

भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने के कारण दूर- दूर से दर्शन करने व आशीर्वाद पाने के लिए आते हैं।
बहुत से भक्तों को नंगे पैर पैदल यात्रा कर आते हुए देखा जाता हैं।
लदानी ताकाश्याम की सेवा सौलंकी परिवार द्वारा दशकों से की जा रही हैं।
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