Thursday, July 9, 2026
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राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा: सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, उदयपुर में मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

सरकार की अनदेखी से नाराज कर्मचारियों ने दी बड़े आंदोलन और कार्य बहिष्कार की चेतावनी

​उदयपुर। राजस्थान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और ग्राम साथियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अखिल राजस्थान महिला और बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने उदयपुर में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी जायज मांगों को सरकार और विभाग के सामने रख रहे हैं, लेकिन उनकी तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में संगठन ने पूरे प्रदेश में आंदोलन और कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।

​मानदेय में वृद्धि समेत कई मुद्दों का नहीं हुआ समाधान

​संयुक्त कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष लक्ष्मी खैर ने बताया कि विभाग ने पहले उन्हें 10 से 15 दिनों में समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया था। इस वार्ता के दौरान नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि और ग्रेच्युटी-पेंशन जैसे बड़े नीतिगत फैसले लेने की बात कही गई थी। लेकिन इस आश्वासन के बाद भी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सरकारी अनदेखी से नाराज होकर संगठन ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

​प्रमुख मांगें: पेंशन, न्यूनतम मजदूरी और एरियर का भुगतान

​संगठन ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों का एक मांग-पत्र जारी किया है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल हैं:

न्यूनतम मजदूरी: जब तक कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जाता, तब तक कोर्ट के फैसले के आधार पर कम से कम ₹20,000 से ₹25,000 न्यूनतम मजदूरी दी जाए।

​रिटायरमेंट लाभ व पेंशन: रिटायरमेंट पर एकमुश्त ₹10 लाख नकद और पेंशन की सुविधा मिले, जो आखिरी मानदेय के 50 फीसदी से कम न हो।

​मध्य प्रदेश की तर्ज पर बढ़ोतरी: मध्य प्रदेश की तर्ज पर मानदेय बढ़ाने और बकाया एरियर का तुरंत भुगतान करने की मांग उठाई गई है।

​ग्रेच्युटी का तुरंत भुगतान: बजट घोषणा 2025-26 के अनुसार सेवामुक्त हो चुके कर्मियों को 1 अप्रैल 2025 से ग्रेच्युटी का भुगतान करने के लिए तुरंत आदेश जारी किए जाएं।

​गैर-आईसीडीएस (Non-ICDS) काम करवाने पर रोक लगाने की मांग

​आंगनबाड़ी कर्मियों ने साफ शब्दों में मांग की है कि उनसे बीएलओ (BLO), चुनाव कार्य, जनगणना और सेनेटरी नैपकिन का ऑनलाइन वितरण जैसे गैर-आईसीडीएस (Non-ICDS) काम करवाना पूरी तरह से बंद किया जाए। इसके अलावा 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित करने और रिक्त पड़े पदों को तुरंत भरने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

​9 महीने का मानदेय बकाया, जेब से भवन किराया भरने को मजबूर कार्यकर्ता

​कर्मचारियों ने बताया कि कुम्हेर (जिला डीग) परियोजना में ठेका प्रथा को पूरी तरह बंद करने और पिछले कार्यकाल का ऑडिट कराने की जरूरत है। इस परियोजना के कर्मचारियों का पिछले 9 महीनों का मानदेय बकाया है, जिसे तुरंत जारी करने की मांग की गई है। इसके अलावा कोटा चेचट परियोजना समेत कई अन्य जगहों पर भी पिछले 1 साल से भुगतान अटका हुआ है।
​ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का किराया भी पिछले 1 साल से विभाग ने नहीं चुकाया है, जिसके कारण कई कार्यकर्ता अपनी जेब से भवन का किराया भरने को मजबूर हैं।

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