Wednesday, May 13, 2026
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मेवाड़ में आस्था का अद्भुत संगम : घोड़च में श्रीचारभुजानाथ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव बना श्रद्धा का केंद्र

भागवत कथा, सप्त दिवसीय हरि-हर महायज्ञ, विशाल भजन संध्या एवं दिव्य धार्मिक आयोजनों से भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र

श्रीचारभुजानाथ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ गणेशजी एवं हनुमानजी की प्रतिमा स्थापना

घोड़च, 12 मई। मेवाड़ अंचल के घोड़च गांव में आयोजित श्रीचारभुजानाथ मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव इन दिनों पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति का केंद्र बना हुआ है। 8 मई से प्रारंभ होकर 14 मई तक चलने वाले इस भव्य धार्मिक आयोजन में आसपास के अनेक गांवों से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। गांव का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है तथा हर ओर वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और धार्मिक जयघोषों की गूंज सुनाई दे रही है।

अयोध्या राम मंदिर के मूर्तिकार ने बनाई भगवान श्रीचारभुजानाथ की प्रतिमा

महोत्सव का सबसे विशेष आकर्षण भगवान श्रीचारभुजानाथ की नई दिव्य प्रतिमा है, जिसे कर्नाटक में भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा निर्मित किया गया है। अरुण योगीराज वही विख्यात शिल्पकार हैं जिन्होंने अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला की प्रतिमा का निर्माण किया है। इस दिव्य प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं आस्था देखने को मिल रही है।

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ज्ञानानंद जी महाराज के मुखारविंद से बह रही भागवत अमृतधारा

महोत्सव के अंतर्गत पूज्य संत ज्ञानानंद जी महाराज के मुखारविंद से प्रतिदिन रात्रि 8 बजे श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा श्रवण के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा पंडाल में देर रात तक श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आते हैं।

पंचकुंडीय सप्त दिवसीय हरि-हर महायज्ञ से गुंजायमान हो रहा क्षेत्र

8 मई से प्रारंभ हुए पंचकुंड आत्मक सप्त दिवसीय हरि-हर महायज्ञ में वैदिक परंपराओं के अनुसार विविध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। यज्ञ में मूर्तियों के 13 प्रकार के अधिवासन, मंदिर एवं मूर्तियों का महा स्नान, रुद्राभिषेक, विष्णु सहस्त्रनाम एवं अन्य वैदिक अनुष्ठानों के साथ लगभग एक लाख से अधिक आहुतियां दी जाएंगी।

आज मंदिर एवं मूर्तियों का जलाभिषेक श्रद्धा एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हो रहा है। यज्ञाचार्य पवन जी व्यास के सानिध्य में पूरा क्षेत्र धार्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत बना हुआ है।

श्रीचारभुजानाथ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ गणेशजी एवं हनुमानजी की प्रतिमा स्थापना

श्रीचारभुजानाथ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत गांव के मुख्य चौराहे पर भगवान श्रीगणेशजी एवं संकटमोचन हनुमानजी की प्रतिमाओं की स्थापना भी श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान के साथ की जा रही है। धार्मिक आयोजन के तहत पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमा स्थापना कार्यक्रम संपन्न हो रहा है। गांव में चल रहे महोत्सव के साथ इस आयोजन को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है।

गांव में मेले जैसा माहौल, प्रतिदिन 5 से 6 हजार श्रद्धालुओं के लिए भंडारा

महोत्सव के दौरान पूरे गांव में मेले जैसा दृश्य देखने को मिल रहा है। बच्चों एवं श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए विभिन्न झूले एवं आकर्षण लगाए गए हैं। प्रतिदिन विशाल ग्राम भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 5 से 6 हजार श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद तैयार किया जा रहा है।

गांव के कार्यकर्ता एवं ग्रामीण तन, मन और धन से इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। जिसे जैसा अवसर मिल रहा है, वह अपनी श्रद्धा अनुसार सेवा देकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहा है।

13 मई को होगा भगवान का भव्य नगर भ्रमण एवं विशाल भजन संध्या

महोत्सव के तहत 13 मई, बुधवार को सुबह 9 बजे भगवान श्रीचारभुजानाथ का भव्य नगर भ्रमण निकाला जाएगा। वहीं रात्रि 8 बजे विशाल भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें प्रसिद्ध भजन गायक भगवत सुथार एवं बाल भजन गायक तिलकेश सुथार अपनी भक्तिमयी प्रस्तुतियां देंगे।

14 मई को अभिजीत मुहूर्त में होगी प्राण-प्रतिष्ठा एवं मूर्ति स्थापना

महोत्सव का मुख्य आयोजन 14 मई, गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर संपन्न होगा। वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ भगवान श्रीचारभुजानाथ की प्रतिमा की स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इसी दिन यज्ञ की पूर्णाहुति भी होगी।

संतों एवं जनप्रतिनिधियों का मिलेगा सानिध्य

महोत्सव में संत अवधेशानन्द चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज का सानिध्य प्राप्त होगा। वहीं मुख्य अतिथियों के रूप में विश्वराज सिंह मेवाड़, महिमा कुमारी मेवाड़, सी. पी. जोशी एवं देवकीनंदन गुर्जर सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहेंगे।

समस्त ग्रामवासियों ने किया श्रद्धालुओं से पधारने का आग्रह

समस्त ग्रामवासी घोड़च ने क्षेत्र के धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से परिवार एवं इष्ट मित्रों सहित अधिक से अधिक संख्या में पधारकर आयोजन की शोभा बढ़ाने का आग्रह किया है। गांव में चल रहा यह धार्मिक आयोजन मेवाड़ क्षेत्र में आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का अनुपम उदाहरण बनता जा रहा है।

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