Thursday, July 16, 2026
No menu items!
HomeLocal News"हमें किडनी दो या मौत की इजाज़त" — कोटा की 5 नई...

“हमें किडनी दो या मौत की इजाज़त” — कोटा की 5 नई माताओं की राष्ट्रपति से गुहार, चिकित्सा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

  • कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सी-सेक्शन कराने वाली 5 महिलाओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा
  • महिलाओं का आरोप है कि नकली दवाओं या चिकित्सा लापरवाही के कारण उनकी दोनों किडनियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं
  • सभी महिलाएं पिछले लगभग दो महीनों से अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती हैं और नियमित डायलिसिस पर निर्भर हैं।
  • महिलाओं ने तत्काल किडनी प्रत्यारोपण, दोषियों पर कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की है।
  • मांगें पूरी नहीं होने पर उन्होंने इच्छामृत्यु (Euthanasia) की अनुमति देने की अपील की है।

READF MORE : अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने किया देवास चतुर्थ बांध एवं सुरंग परियोजना का निरीक्षण

कोटा, 15 जुलाई 2026। राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 5 से 7 मई के बीच सी-सेक्शन (ऑपरेशन से प्रसव) कराने वाली पांच महिलाओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भावुक पत्र लिखकर अपनी जान बचाने की अपील की है।

महिलाओं ने पत्र में लिखा है कि उन्हें या तो तत्काल किडनी प्रत्यारोपण (Kidney Transplant) की सुविधा उपलब्ध कराई जाए या फिर इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए, क्योंकि लगातार डायलिसिस के सहारे जीवन जीना उनके लिए असहनीय हो चुका है।

क्या हैं महिलाओं के आरोप?

महिलाओं का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान चिकित्सा लापरवाही हुई और उन्हें दी गई नकली अथवा घटिया दवाओं के कारण उनकी किडनियां गंभीर रूप से खराब हो गईं। उनका कहना है कि अब वे पूरी तरह डायलिसिस पर निर्भर हैं और सामान्य जीवन जीने की स्थिति में नहीं हैं।

महिलाओं ने पत्र में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, पर्याप्त आर्थिक मुआवजा और शीघ्र किडनी प्रत्यारोपण की मांग की है।

दो महीने से अस्पताल से भर्ती

सभी पांच महिलाएं कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (SSB) में भर्ती हैं। प्रसव के बाद से उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

राजस्थान में मातृ मृत्यु के बढ़ते मामले

कोटा की घटना ऐसे समय सामने आई है जब राजस्थान में प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण लगातार मौतें हो रही हैं।

पिछले कुछ समय में:

  • कोटा में 5 महिलाओं की मौत।
  • भीलवाड़ा में 5 महिलाओं की मौत।
  • बांसवाड़ा में 4 महिलाओं की मौत।
  • बीकानेर में भी एक महिला की मौत का मामला सामने आया है।

इन घटनाओं ने प्रदेश की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री का क्या कहना है?

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मीडिया में कहा कि सभी मामलों की जांच की जा रही है और हर मौत का कारण अलग-अलग है।

बांसवाड़ा के मामलों पर

मंत्री के अनुसार:

एक महिला ने दो महीने की गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह के बिना गर्भपात की दवा ली।
दूसरी महिला मध्य प्रदेश से गंभीर हालत में लाई गई थी। यात्रा के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई थी।
अन्य दो महिलाओं की मौत प्रसव के बाद उच्च रक्तचाप और लिवर संबंधी जटिलताओं के कारण हुई।

भीलवाड़ा के मामलों पर

मंत्री ने बताया कि:

एक महिला की मौत गर्भावस्था से संबंधित नहीं बल्कि गर्भाशय के ऑपरेशन के बाद हार्ट अटैक से हुई।
दूसरी महिला गंभीर हालत में भर्ती हुई थी और इलाज के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (Hypovolemic Shock) से उसकी मौत हुई।
बाकी तीन महिलाओं की मौत पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म, HELLP सिंड्रोम, प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) और DIC जैसी गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के कारण हुई।

बीकानेर में भी एक और मौत

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी 25 वर्षीय महिला की सी-सेक्शन के बाद उत्पन्न जटिलताओं से लगभग एक महीने तक इलाज चलने के बाद मौत हो गई।

जांच जारी

राज्य सरकार का कहना है कि सभी मामलों की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि कहीं चिकित्सा लापरवाही या दवाओं में गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular