Thursday, August 13, 2026
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फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका में श्वानों की नसबंदी-टीकाकरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल

ठेका कंपनी पर 100 से अधिक श्वान उठाने का आरोप, रिकॉर्ड में सिर्फ 28 दर्ज होने का दावा

एक कमरे में बड़ी संख्या में श्वानों को रखने का आरोप, कई के बीमार होने की शिकायत

9 जुलाई को ₹1,649 प्रति श्वान की दर से झुंझुनूं की फर्म को दिया गया था ठेका, पशु सेवा समिति ने फतहनगर थाने में दी शिकायत

फतहनगर-सनवाड़, 12 अगस्त। नगर क्षेत्र में श्वानों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण के लिए चलाए जा रहे अभियान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। श्री पशुपतिनाथ निराश्रित पशु सेवा समिति ने फतहनगर थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया है कि नगर पालिका द्वारा इस कार्य के लिए अधिकृत ठेकेदार फर्म की ओर से श्वानों को पकड़ने, रखने, उपचार करने और वापस छोड़ने में लापरवाही बरती जा रही है।

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समिति का आरोप है कि नगर क्षेत्र से 100 से अधिक श्वानों को उठाया जा चुका है, जबकि रिकॉर्ड में केवल 28 श्वान दर्ज किए जा रहे हैं। समिति के अनुसार, जिन स्थानों से श्वानों को पकड़ा गया, उनका भी व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

एक कमरे में बड़ी संख्या में श्वानों को रखने का आरोप

थाने में दी गई शिकायत के मुताबिक, पकड़े गए श्वानों को एक ही कमरे में बड़ी संख्या में रखा गया। समिति का आरोप है कि इससे श्वान आपस में लड़ने लगे और एक-दूसरे को काटने की स्थिति बनी।

समिति के अनुसार, इस अव्यवस्था के कारण कई श्वानों की तबीयत खराब हुई और कुछ श्वान बेहोशी जैसी हालत में भी पहुंच गए। समिति ने इसे पशुओं के प्रति गंभीर लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल: 100 से ज्यादा श्वान उठे तो रिकॉर्ड में सिर्फ 28 क्यों?

समिति के सचिव के अनुसार, श्वानों को रेबीज टीकाकरण और नसबंदी के लिए नगर के अलग-अलग इलाकों से पकड़ा जा रहा है। हालांकि, श्वानों को पकड़ने की तारीख, स्थान, संख्या और नसबंदी व टीकाकरण के बाद उन्हें कहां छोड़ा गया, इसका पारदर्शी रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।

समिति का दावा है कि 100 से अधिक श्वान पकड़े गए, जबकि दस्तावेजी रिकॉर्ड में केवल 28 श्वान दर्ज हैं। ऐसे में पूरे अभियान की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

जनता के दबाव के बाद श्वानों को छोड़ने का फैसला

मामला सामने आने और स्थानीय लोगों के दबाव के बाद ठेकेदार फर्म की ओर से श्वानों को छोड़ने का फैसला किए जाने की बात सामने आई है।

हालांकि, समिति का आरोप है कि श्वानों को उसी स्थान पर वापस छोड़ने के बजाय अन्य स्थानों पर छोड़ा जा रहा है और उन्हें छोड़ने का भी कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं बनाया जा रहा।

यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठता है कि जिस क्षेत्र से श्वान को पकड़ा गया था, नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसे उसी क्षेत्र में वापस छोड़ा गया या नहीं, इसकी निगरानी कौन कर रहा है?

नगरपालिका ने ₹1,649 प्रति श्वान की दर से दिया ठेका

मामले में सामने आए नगरपालिका के कार्यादेश के अनुसार, फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका ने 9 जुलाई 2026 को श्री सिद्धी एनिमल वेलफेयर सोसाइटी, जिला झुंझुनूं को यह कार्य सौंपा था।

कार्यादेश के अनुसार, फर्म को नगरपालिका क्षेत्र के सभी 25 वार्डों में श्वानों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण का कार्य करना है। इसके लिए ₹1,649 प्रति श्वान की दर निर्धारित की गई है।

कार्यादेश में कार्य की अवधि 9 जुलाई 2026 से 8 जनवरी 2027 तक यानी छह महीने निर्धारित की गई है।

इस तरह नगरपालिका क्षेत्र में श्वानों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए बाकायदा सरकारी स्तर पर ठेका दिया गया है और प्रत्येक श्वान के लिए निर्धारित दर के अनुसार भुगतान किया जाना है।

नगरपालिका की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल

पूरे मामले में सवाल केवल ठेकेदार फर्म की कार्यप्रणाली पर ही नहीं, बल्कि नगरपालिका की निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहे हैं।

जब प्रत्येक श्वान के लिए ₹1,649 का भुगतान किया जाना है, तो अभियान के तहत निम्न रिकॉर्ड का व्यवस्थित रूप से उपलब्ध होना जरूरी है—

  • कितने श्वान पकड़े गए?
  • किस वार्ड से कितने श्वान पकड़े गए?
  • क्या पकड़े गए श्वानों की जियोटैगिंग की जा रही है?
  • किन श्वानों की नसबंदी की गई?
  • किन श्वानों को रेबीज का टीका लगाया गया?
  • किस तारीख को कौन सा श्वान छोड़ा गया?
  • श्वान को किस स्थान से पकड़ा गया और वापस कहां छोड़ा गया?
  • कुल कितने श्वानों के लिए नगरपालिका की ओर से भुगतान किया जाएगा?

समिति का आरोप है कि फिलहाल ऐसा पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

क्या निर्धारित पशु कल्याण मानकों का पालन हुआ?

नगरपालिका के कार्यादेश के अनुसार फर्म को छह महीने तक 25 वार्डों में नसबंदी और रेबीज टीकाकरण का कार्य करना है।

लेकिन समिति की शिकायत और सामने आए वीडियो में बड़ी संख्या में श्वानों को एक साथ रखे जाने के आरोप के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या श्वानों को पकड़ने, रखने, उपचार करने और वापस छोड़ने के दौरान निर्धारित पशु कल्याण मानकों का पालन किया गया।

इन आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभाग द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है।

फतहनगर थाने में शिकायत, जांच का इंतजार

11 अगस्त 2026 को श्री पशुपतिनाथ निराश्रित पशु सेवा समिति की ओर से फतहनगर थाने में शिकायत दी गई। शिकायत में श्वानों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और लापरवाही के मामले में कार्रवाई की मांग की गई है।

अब पुलिस और नगरपालिका प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि—

  • क्या वास्तव में 100 से अधिक श्वान पकड़े गए थे?
  • यदि हां, तो रिकॉर्ड में केवल 28 श्वान क्यों दर्ज हैं?
  • बाकी श्वान कहां हैं?
  • किन-किन वार्डों से श्वान पकड़े गए?
  • उन्हें कहां रखा गया?
  • कितने श्वानों की नसबंदी और टीकाकरण हुआ?
  • उन्हें कब और कहां वापस छोड़ा गया?
  • और सबसे महत्वपूर्ण, ₹1,649 प्रति श्वान के सरकारी ठेके में रिकॉर्ड और वास्तविक कार्य का मिलान कौन करेगा?

फिलहाल समिति की शिकायत, नगरपालिका के कार्यादेश और सामने आए वीडियो के आधार पर फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका की श्वान नसबंदी एवं टीकाकरण व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए पकड़े गए प्रत्येक श्वान का रिकॉर्ड, नसबंदी-टीकाकरण की जानकारी और उन्हें वापस छोड़े जाने का विवरण पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराया जाना महत्वपूर्ण है।

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