योगी सरकार ने सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिया है कि वे विशेष अभियान चलाकर अवैध रूप से वक्फ संपत्ति घोषित की गई जमीनों की पहचान करें। राजस्व विभाग सर्वे कर यह जांच कर रहा है कि कहीं सरकारी भूमि को वक्फ संपत्ति बताकर अवैध कब्जा तो नहीं किया गया है।
| 1. यूपी के सभी जिलों में अवैध वक्फ संपत्तियों का पता लगाया जा रहा है 2. राजस्व विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर सर्वे कर रहे है 3. लोकसभा और राज्यसभा से पास हो चुका है वक्फ संशोधन बिल |
लखनऊ: लोकसभा और राज्यसभा से वक्फ संशोधन बिल पारित होने के बाद योगी सरकार एक्शन मोड में आ गई है। प्रदेशभर में अवैध रूप से वक्फ घोषित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की तैयारी हो रही है। इसको लेकर सभी जिलों के डीएम को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, आधिकारिक अभिलेखों में केवल 2963 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं, जबकि कई अन्य संपत्तियां अवैध रूप से वक्फ घोषित की गई हैं। सरकार का स्पष्ट कहना है कि सरकारी और ग्राम समाज की भूमि को वक्फ संपत्ति नहीं माना जा सकता, फिर भी प्रदेश में कई जमीनों को नियमों को दरकिनार कर वक्फ घोषित कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश में कई संपत्तियों को गलत तरीके से वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया है, जिनमें खलिहान, तालाब और पोखर जैसी सार्वजनिक जमीनें भी शामिल हैं। पीलीभीत में एक तालाब की जमीन को वक्फ घोषित किए जाने का मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसी के मद्देनजर राजस्व विभाग ने प्रदेशभर में व्यापक सर्वे शुरू किया है। इस सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कितनी संपत्तियों को अवैध रूप से वक्फ घोषित किया गया है। सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्व रिकॉर्ड में अधिकांश संपत्तियों का उल्लेख नहीं
उत्तर प्रदेश में जमीनों के नामांतरण के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रक्रिया स्पष्ट रूप से परिभाषित है। शहरी इलाकों में ‘जेड ए’ श्रेणी के अलावा अन्य संपत्तियों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता। वक्फ बोर्ड के रजिस्टर-37 में सुन्नी वक्फ बोर्ड की 1,24,355 और शिया वक्फ बोर्ड की 7,785 संपत्तियां दर्ज हैं। हालांकि, जिलाधिकारियों से मिली रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व अभिलेखों में केवल 2,533 सुन्नी और 430 शिया संपत्तियां ही पंजीकृत हैं। इसका सीधा अर्थ है कि अधिकांश संपत्तियां राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हैं। सरकार का मानना है कि इन संपत्तियों को राज्य सरकार अपने नियंत्रण में ले सकती है।
केवल दान की गई संपत्ति को ही वक्फ माना जाएगा
राजस्व विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को व्यापक सर्वेक्षण करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उनसे यह जानकारी मांगी गई है कि उनके जिले में कितनी संपत्तियों को नियमों के विरुद्ध वक्फ घोषित किया गया है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि ग्राम समाज और सरकारी जमीनें वक्फ संपत्ति नहीं हो सकतीं। केवल दान में दी गई संपत्तियों को ही वक्फ के रूप में मान्यता दी जा सकती है।
