Tuesday, March 31, 2026
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विमान की 11A सीट: जिससे यात्री कतराते हैं, उसी ने बचाई एक जान

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (AI171) की 11A सीट पर बैठे रमेश एक चमत्कारी तरीके से हादसे में बच गए। ब्रिटिश नागरिक रमेश अपने 45 वर्षीय भाई अजय कुमार रमेश के साथ भारत आए थे, जहां वे अपने परिवार से मिलने पहुंचे थे। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (AI171) की 11A सीट पर बैठे रमेश एक चमत्कारी तरीके से हादसे में बच गए। ब्रिटिश नागरिक रमेश अपने 45 वर्षीय भाई अजय कुमार रमेश के साथ भारत आए थे, जहां वे अपने परिवार से मिलने पहुंचे थे। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (AI171) की 11A सीट पर बैठे रमेश एक चमत्कारी तरीके से हादसे में बच गए। ब्रिटिश नागरिक रमेश अपने 45 वर्षीय भाई अजय कुमार रमेश के साथ भारत आए थे, जहां वे अपने परिवार से मिलने पहुंचे थे।

विश्वास कुमार रमेश—यह नाम गुरुवार दोपहर से सुर्खियों में है। वजह भी खास है: रमेश वही अकेले यात्री हैं जो गुजरात के अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे में चमत्कारी रूप से जीवित बचे। बताया जा रहा है कि उनकी सीट 11A इस बचाव की एक अहम वजह रही, जिसे आमतौर पर यात्री पसंद नहीं करते। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 250 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। फिलहाल, जांच एजेंसियां हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटी हैं।

क्यों यात्री 11A सीट से दूरी बनाते हैं

रमेश की सीट 11A थी, जिसे अक्सर यात्री लेने से कतराते हैं। पिछले साल द सन को दिए गए इंटरव्यू में फ्लाइट अटेंडेंट्स ने बताया था कि 11A और 11F सीटें विमान के बीचों-बीच होती हैं। यही वजह है कि इन पर बैठे लोगों को प्लेन से बाहर निकलने में सबसे आखिर में मौका मिलता है। हालांकि ये दोनों विंडो सीट्स होती हैं, लेकिन जो यात्री जल्दी उतरना चाहते हैं, वे आमतौर पर 11वीं रो की सीटों से परहेज करते हैं।

11A सीट को नापसंद करने की एक और वजह यह है कि यहां बैठने वाले यात्रियों को बाहर का खास नजारा देखने को नहीं मिलता। इसका मुख्य कारण यह है कि इस सीट पर आमतौर पर खिड़की या तो बहुत छोटी होती है या फिर होती ही नहीं। फ्लाइट रडार 24 के एक विशेषज्ञ के मुताबिक, बोइंग के एयर कंडीशनिंग सिस्टम की बनावट के कारण कई बार 11A सीट के पास खिड़की नहीं दी जाती।

कैसे बचे रमेश

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (AI171) की 11A सीट पर बैठे रमेश चमत्कारिक रूप से हादसे में जीवित बच गए। ब्रिटिश नागरिक रमेश अपने 45 वर्षीय भाई अजय कुमार रमेश के साथ भारत आए थे, जहां वे अपने परिवार से मिलने पहुंचे थे। हादसे के वक्त दोनों भाई अलग-अलग पंक्तियों में बैठे थे। हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में रमेश ने बताया, “जब मैं होश में आया, तो चारों ओर लाशें बिखरी थीं। मैं घबरा गया और भागने लगा। मेरे इर्द-गिर्द विमान के टुकड़े पड़े थे। तभी किसी ने मुझे पकड़कर एम्बुलेंस में डाला और अस्पताल ले गया।”

हादसा

एयर इंडिया के अनुसार, हादसे का शिकार हुए विमान में कुल 230 यात्री सवार थे, जिनमें 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, एक कनाडाई और सात पुर्तगाली नागरिक शामिल थे। इसके अलावा, विमान में दो पायलट और चालक दल के 10 सदस्य मौजूद थे। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ने उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद अचानक तेजी से नीचे गिरना शुरू कर दिया और क्रैश हो गया। घटनास्थल से घना काला धुआं उठता देखा गया। 11 साल पुराने इस विमान की लंबी दूरी की उड़ान के लिए ईंधन टंकी पूरी तरह भरी हुई थी। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि विमान गिरने से पहले केवल 600 से 800 फुट की ऊंचाई तक ही पहुंच पाया था।


क्या है वजह


अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के अनुसार, बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ने दोपहर 1:39 बजे जैसे ही उड़ान भरी, उसके पायलट ने तुरंत ‘मेडे’ कॉल दिया, जो एक गंभीर आपात स्थिति का संकेत होता है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती वीडियो फुटेज के आधार पर हादसे की संभावित वजह दोनों इंजनों का ठीक से काम न करना या किसी पक्षी से टकराव हो सकता है। टेलीविजन पर प्रसारित फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि विमान उड़ान भरते ही नीचे की ओर झुक गया था, और उस समय उसका लैंडिंग गियर भी पूरी तरह से बाहर था।

यह पहली बार है जब अत्याधुनिक तकनीकों से लैस बोइंग ड्रीमलाइनर किसी बड़े हादसे का शिकार हुआ है। साथ ही, यह भारत में 2020 के बाद की दूसरी सबसे बड़ी विमान दुर्घटना मानी जा रही है। इससे पहले, 2020 में एयर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान कोझीकोड (केरल) में गीले रनवे पर फिसलकर दो टुकड़ों में बंट गया था। उस हादसे में 190 यात्रियों में से 21 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें दोनों पायलट भी शामिल थे।






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