Wednesday, March 25, 2026
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सिंदूर में जीवंत हुई राजस्थानी शौर्य गाथाएं, विश्व कविता दिवस पर वीरता-त्याग व संस्कृति का दर्शन

उदयपुर, 24मार्च।

विश्व कविता दिवस एवं राजस्थान स्थापना समारोह की श्रृंखला के अंतर्गत 21मार्च शनिवार को राजस्थान साहित्य अकादमी एवं पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में सेक्टर-4 स्थित राजस्थान साहित्य अकादमी सभागार में “सिंदूर” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान की वीरता, त्याग एवं समृद्ध संस्कृति की झलकियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान वीर रस से ओत-प्रोत राष्ट्रभक्ति कविता “मात सु मरणो भलो, बलिदान रुकवा दु नहीं, शीश हंस कर वार दु पर देश झुकवा दु नहीं” की प्रभावशाली प्रस्तुति राजस्थानी मायड़ भाषा में मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज की छात्रा एडवोकेट सिमरन देवल द्वारा दी गई। उनकी ओजस्वी प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह में देशभक्ति, स्वाभिमान एवं वीरता की भावना का संचार किया।

इसी क्रम में राजस्थानी पारंपरिक परिधानों की झलक प्रस्तुत करते हुए सिमरन देवल एवं शिवांश सिंह चारण द्वारा ढूंढ शैली में अभिनय की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

“सिंदूर” के नाट्यक्रम का मंचन डॉ. शिवदान सिंह झोलावास के निर्देशन में किया गया। इस प्रस्तुति के अंतर्गत राजस्थान के इतिहास की अमर गाथाओं को आपस में जोड़ते हुए राजस्थानी शौर्य गाथाओं का सजीव मंचन किया गया।
प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से राजस्थान की वीरता, बलिदान एवं गौरवशाली परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शक भावविभोर हो उठे।

इस अवसर पर छात्राओं द्वारा पारंपरिक राजस्थानी परिधानों की विशेष प्रस्तुति भी दी गई। फैशन टेक्नोलॉजी विभाग की छात्राओं ने डॉ. डॉली मोगरा, अनु जैन एवं छवि के निर्देशन में पारंपरिक परिधानों का आकर्षक प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।

कार्यक्रम का मंच संचालन एडवोकेट सिमरन देवल द्वारा प्रभावी ढंग से किया गया। उनके सशक्त संचालन ने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित बनाए रखा।
इस अवसर पर आरएसएमएम के वित्तीय सलाहकार भारतीराज, डॉ. चंद्रगुप्त सिंह एवं डॉ. विजयप्रकाश विल्वली सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित दर्शकों ने सभी प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।

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