वाटर हॉल पद्धति से मापी जाएगी जंगल की धड़कन
1 मई से शुरू होगी वन्यजीव गणना, अधिकारियों-कार्मिकों को दिया प्रशिक्षण
उदयपुर, 23 अप्रैल। झीलों की नगरी उदयपुर के वन्यजीव अभयारण्यों में इस वर्ष वन्यजीवों की संख्या का आकलन करने के लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वर्ष 2026 की वन्यजीव गणना 1 मई की शाम 5 बजे से शुरू होकर 2 मई की शाम 5 बजे तक लगातार 24 घंटों तक संचालित की जाएगी। इस गणना को लेकर गुरुवार को वन भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में करीब 79 अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
इस बार गणना के समय में हुआ बदलाव
आमतौर पर वन्यजीव गणना सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक की जाती थी, लेकिन इस वर्ष विभाग ने समय में बदलाव किया है। अब यह प्रक्रिया पूर्णिमा (1 मई) की शाम से शुरू होकर अगले दिन शाम तक चलेगी।

वाटर हॉल पद्धति का होगा उपयोग
वन्यजीवों की गणना के लिए प्रसिद्ध वाटर हॉल पद्धति अपनाई जाएगी। इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि गर्मी के मौसम में सभी वन्यजीव 24 घंटे के भीतर कम से कम एक बार पानी पीने के लिए जलाशयों (वाटरहोल) पर अवश्य आते हैं। मचानों पर तैनात कर्मचारी पानी पीने आने वाले प्रत्येक वन्यजीव का रिकॉर्ड दर्ज करेंगे।
इन क्षेत्रों में होगी गणना और अभ्यास
गणना मुख्य रूप से जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य, सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य और फुलवारी की नाल वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्रों में की जाएगी। मुख्य गणना से दो दिन पूर्व अभ्यास सत्र भी आयोजित किया जाएगा, ताकि गणनाकर्ता अपने क्षेत्र, जानवरों के आने-जाने के मार्ग (एनिमल ट्रेल्स) और उनके व्यवहार को अच्छी तरह समझ सकें।
प्रशिक्षण में समझाई गई बारीकियां
प्रशिक्षण सत्र के दौरान सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक डॉ. सतीश शर्मा तथा सज्जनगढ़ जैविक उद्यान के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु व्यास ने कर्मचारियों को मचान की ऊंचाई, वन्यजीवों की पहचान और गणना के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर उप वन संरक्षक यादवेन्द्र सिंह चुंडावत सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
