जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की कार्यशाला
उदयपुर, 22 अप्रैल। जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार एवं माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई), उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के अनुसूचित क्षेत्रों में स्थित इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसी (जिला इकाइयों) को सुदृढ़ करने हेतु कार्यशाला का आयोजन टीआरआई सभागार में किया गया।
कार्यशाला के प्रारंभिक उद्बोधन में जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक डॉ. वरनाली डेका ने बताया कि जनजाति कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में जिला इकाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका होने से भारत सरकार इन्हें और अधिक सुदृढ़ करना चाहती है। इस सुदृढ़ीकरण प्रक्रिया में फील्ड फीडबैक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उन्होंने प्रतिभागियों को खुलकर अपने सुझाव देने हेतु प्रेरित किया।

कार्यशाला में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के आयुक्त लक्ष्मी नारायण मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान में कुल पांच इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसियां (उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ एवं आबूरोड-सिरोही) कार्यरत हैं। उन्होंने विभाग एवं जिला इकाइयों की संरचना स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
टीआरआई निदेशक ओ.पी. जैन ने सभी संभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और बताया कि राजस्थान की पांचों जिला इकाइयां वर्ष 1974-75 से कार्यरत हैं। उन्होंने इन इकाइयों में तकनीकी विंग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।
उपायुक्त आबूरोड राजलक्ष्मी गहलोत ने ब्लॉक स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित किए जाने का सुझाव दिया। उपायुक्त डूंगरपुर सत्यप्रकाश कस्वां ने छात्रावासों में खेल सुविधाओं के विकास एवं शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार पर विचार साझा किए। उपायुक्त उदयपुर, प्रतापगढ़ एवं बांसवाड़ा ने भी अपने सुझाव कार्यशाला में प्रस्तुत किए।
कार्यशाला का संचालन सुधीर दवे, निदेशक (सांख्यिकी) टीआरआई, उदयपुर ने किया तथा आभार अतिरिक्त आयुक्त अनिल कुमार शर्मा ने व्यक्त किया।
