112 पांडुलिपियों के लिए 11.95 लाख, 21 पुस्तकों पर 1.74 लाख, 9 पत्र-पत्रिकाओं पर 1.80 लाख एवं 5 साहित्यकारों को 1.25 लाख रुपए का सहयोग
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उदयपुर, 1 मई। राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा विभिन्न साहित्यिक सहायता योजनाओं के अंतर्गत कुल 16.74 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह सहयोग वित्तीय वर्ष 2025-2026 के लिए पांडुलिपि प्रकाशन, पुस्तक प्रकाशन, पत्र-पत्रिका सहयोग तथा साहित्यकार आर्थिक सहायता योजनाओं के तहत प्रदान किया गया है।
अकादमी सचिव डॉ. बसंत सिंह सोलंकी ने बताया कि पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग योजना के अंतर्गत कुल 112 पांडुलिपियों को स्वीकृति दी गई है, जिन पर 11.95 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई। इनमें काव्य विधा की 84, कथा/उपन्यास की 21, निबंध/आलोचना की 2 तथा नाटक-एकांकी-विविध विधा की 5 कृतियां शामिल हैं।काव्य विधा में उदयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के रचनाकारों की अनेक कृतियां शामिल हैं,
जिनमें *“बातों ही बातों में” (गिरजा शंकर त्रिवेदी), “प्रकृति के प्रतिबिंब” (डॉ. प्रहलाद राय), “मौन प्रस्थान” (डॉ. मनीष सक्सेना), “सितारे मीर के रंग के” (प्रेरणा सारवान), “उम्मीद अभी जिंदा है” (संजू शृंगी), “मन वृंदावन” (डॉ. राधिका लढ़ा), “भीष्म फिर मौन क्यों” (मृदुल पुरोहित), “सराबोर” (डॉ. मीना बया), “भाव सुमन कृष्णार्पण” (वीणा मावर), “नव रस गगरी छलकी जाएं” (लता शर्मा), “प्रेमरूप” (अनुराग सिहरा), “अलसाया तन-मन” (राम गोपाल गौतम), “एक माँ, एक मैं, एक सफर” (नंदनी शर्मा), “चेतना के गवाक्ष” (डॉ. सुरेश चतुर्वेदी), “फ
