फतहनगर, उदयपुर। पोक्सो (POCSO) के एक महत्वपूर्ण मामले में न्यायालय ने नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को कड़ी सजा सुनाते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। साथ ही अन्य अपराध में भी दोषसिद्धि करते हुए अतिरिक्त सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 2 लाख रुपये की सहायता दिलाने की भी अनुशंसा की है।
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बहला-फुसलाकर ले गया था आरोपी
प्रकरण के अनुसार, 7 अगस्त 2024 को पीड़िता की मां ने फतहनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी 17 वर्षीय पुत्री रात में घर से गायब हो गई थी। वह अपने साथ सोने-चांदी के कुछ आभूषण भी ले गई थी।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और किशोरी को खाटूश्यामजी स्थित एक होटल से दस्तयाब किया। वहीं से आवरी माता मंदिर, फतहनगर निवासी सलमान पुत्र सलीम नीलगर को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ के दौरान किशोरी ने आरोपी द्वारा बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
19 गवाह और 40 दस्तावेज बने अहम साक्ष्य
सुनवाई के दौरान विशिष्ट लोक अभियोजक महेंद्र कुमार ओझा ने न्यायालय के समक्ष 19 गवाहों के बयान और 40 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत 5 वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं पोक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
किंग सेना मातृभूमि धर्म संघ, बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि आखिरकार पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर सजा समाज में अपराधियों के लिए सख्त संदेश देती है तथा पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत करती है।
