दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में अहम जानकारी सामने आई है. जांच एजेंसियों के मुताबिक आतंकी लाल किला, इंडिया गेट सहित दिल्ली-एनसीआर के कई महत्वपूर्ण इलाकों में धमाके और हिंसा फैलाने की तैयारी में थे. हमलावरों को सीमापार बैठे सरगना निर्देश दे रहे थे.
दिल्ली-एनसीआर में आतंकी थे सक्रिय :जांच में सामने आया है कि पकड़ा गया आतंकी मॉड्यूल जनवरी से ही दिल्ली और एनसीआर में बड़े हमलों की तैयारी में लगा था. उनका लक्ष्य बड़े पैमाने पर अफरा-तफरी फैलाना और सांप्रदायिक तनाव भड़काना था. जम्मू-कश्मीर पुलिस की पूछताछ में यह भी पता चला कि उनकी लिस्ट में लाल किला, इंडिया गेट, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, रेलवे स्टेशन और कई प्रमुख शॉपिंग मॉल शामिल थे.
हिंसा भड़काने की थी साजिश :एजेंसियों का कहना है कि इस मॉड्यूल ने अमोनियम नाइट्रेट की बड़ी मात्रा जुटाई थी और 200 से ज्यादा ताकतवर आईईडी बनाने की तैयारी कर रहा था. योजना थी कि इन बमों को एक साथ दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद के संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल इलाकों में विस्फोट के लिए इस्तेमाल किया जाए. सूत्र बताते हैं कि मॉड्यूल धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाकर दिल्ली-एनसीआर में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश में था.
आतंकियों को निर्देश सीमापार से दिए जा रहे थे : जांच में यह सामने आया है कि इस साजिश के पीछे पुलवामा, शोपियां और अनंतनाग के कुछ कट्टरपंथी डॉक्टरों का नेटवर्क सक्रिय था, जिन्होंने एनसीआर में अपनी जड़ें मजबूत कर ली थीं. सीमापार बैठे आतंकी संगठनों के हैंडलरों ने इन्हें इसलिए जोड़ा था ताकि इन पर आसानी से शक न हो. निर्देश सीमा पार से ही आते थे और यहां मौजूद उनके लोग उन योजनाओं को आगे बढ़ा रहे थे.
जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर ने उनका ब्रेनवॉश किया था: पूछताछ में सामने आया कि विदेशी हैंडलरों से संपर्क होने के बाद ये डॉक्टर धीरे-धीरे कट्टरपंथ की ओर बढ़ने लगे. जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलरों ने उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित कर आतंकी नेटवर्क में शामिल किया. एजेंसियों के मुताबिक यह मॉड्यूल राजधानी में एक साथ कई धमाके कर देशभर में डर फैलाने की तैयारी कर रहा था. फिलहाल टीमें पूरे विदेशी नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही हैं.
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