- 15 अगस्त योजना को शुरू करने की संभावना
- मोबाइल चलाना नहीं आता तो ई-मित्र से बुकिंग
जयपुर। राजस्थान में किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े होने से राहत देने की तैयारी शुरू हो गई है। कृषि विभाग प्रदेश में यूरिया और डीएपी की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था लागू करने जा रहा है। नई व्यवस्था में किसान घर बैठे मोबाइल से खाद की बुकिंग कर सकेंगे और बुकिंग के बाद उन्हें डिजिटल ई-टोकन मिलेगा। इसी टोकन के आधार पर किसान चयनित खाद केंद्र से खाद ले सकेंगे।
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FFS ऐप से होगी खाद की बुकिंग
इस व्यवस्था के लिए FFS (Framework for Fertilizer Sale) ऐप को प्रमुख माध्यम बनाया गया है। किसान मोबाइल में FFS ऐप डाउनलोड कर अपना राज्य, जिला और गांव चुन सकेगा। इसके बाद आधार या फार्मर आईडी से पहचान सत्यापित होगी। किसान की जमीन, रकबा और बोई गई फसल की जानकारी सामने आने के बाद उसकी जरूरत के अनुसार खाद की मात्रा तय करने में मदद मिलेगी।
बुकिंग के दौरान किसान को आसपास के सरकारी सहकारी केंद्र और निजी खाद विक्रेताओं की जानकारी भी ऐप पर दिखाई देगी। किसान अपनी सुविधा के अनुसार केंद्र चुनकर खाद बुक कर सकेगा। बुकिंग पूरी होने के बाद क्यूआर कोड वाला ई-टोकन जारी होगा।
मोबाइल चलाना नहीं आता तो ई-मित्र से बुकिंग
जिन किसानों को मोबाइल ऐप चलाने में परेशानी है, उनके लिए ई-मित्र के माध्यम से भी खाद की बुकिंग कराने की व्यवस्था रहेगी। किसान को वहां अपनी फार्मर आईडी उपलब्ध करानी होगी। यानी ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बावजूद तकनीकी जानकारी नहीं रखने वाले किसानों के लिए भी वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध रहेगी।
48 घंटे तक वैध रहेगा ई-टोकन
ऑनलाइन बुकिंग के बाद जारी किया गया डिजिटल टोकन 48 घंटे तक वैध रहेगा। इस अवधि में किसान चयनित खाद केंद्र से खाद ले सकेगा। निर्धारित समय में खाद नहीं लेने पर टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा और किसान को दोबारा बुकिंग करनी होगी।
पहले बुकिंग, फिर खाद—स्टॉक की जानकारी भी मिलेगी
नई व्यवस्था में किसान को पहले से पता चल सकेगा कि आसपास किस केंद्र पर खाद उपलब्ध है। खाद की मात्रा और कीमत की जानकारी भी बुकिंग के दौरान मिलने की व्यवस्था है। खाद लेने के बाद बिल में खरीदी गई मात्रा और कीमत का रिकॉर्ड दर्ज होगा।
नई प्रणाली का एक बड़ा फायदा यह होगा कि खाद विक्रेता के पास उपलब्ध स्टॉक की जानकारी विभाग के डिजिटल सिस्टम में दर्ज रहेगी। इससे स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद खाद नहीं देने और खाद की कालाबाजारी जैसी शिकायतों पर निगरानी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
फार्मर आईडी से जुड़ेगा किसान का रिकॉर्ड
राजस्थान में करीब 88 लाख किसानों की फार्मर आईडी तैयार हो चुकी है, जबकि करीब 10 लाख किसानों की आईडी अभी लंबित बताई गई है। फार्मर आईडी में किसान की जमीन, रकबा, डिजिटल नक्शे और फसल से जुड़ी जानकारी दर्ज है। आने वाले समय में विभिन्न सरकारी योजनाओं को भी फार्मर आईडी से जोड़ने की तैयारी है।
सहकारी समिति या निजी विक्रेता चुनने का विकल्प
नई व्यवस्था में किसान के पास खाद लेने के लिए विकल्प रहेगा। सहकारी समिति से जुड़े किसान अपनी समिति से खाद ले सकेंगे, जबकि अन्य किसान उपलब्ध विकल्पों में से निजी रिटेलर या अन्य अधिकृत खाद केंद्र का चयन कर सकेंगे। उद्देश्य यह है कि किसान को अपनी सुविधा के अनुसार नजदीकी केंद्र से खाद मिल सके।
सिरोही और राजसमंद में पायलट प्रोजेक्ट से हुई शुरुआत
ऑनलाइन खाद वितरण व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट जून में सिरोही और राजसमंद जिलों में शुरू किया गया था। दोनों जिलों में अब तक 70 हजार से ज्यादा किसानों को करीब 10 हजार टन यूरिया ऐप के माध्यम से वितरित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पायलट प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणामों के बाद इस मॉडल को राजस्थान के दूसरे हिस्सों में लागू करने की तैयारी है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्र से 175 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
लंबी कतार और बार-बार केंद्र जाने की जरूरत होगी कम
ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था लागू होने के बाद किसान पहले से खाद बुक कर सकेगा। इससे खाद केंद्र पर पहुंचने के बाद लंबी लाइन में खड़े रहने और कई बार केंद्र के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। ऐप पर उपलब्ध केंद्रों और स्टॉक की जानकारी मिलने से किसान पहले ही अपनी सुविधा के अनुसार केंद्र चुन सकेगा।
जरूरत से ज्यादा खाद की खरीद पर भी नजर
नई व्यवस्था में किसान की जमीन, फसल और वास्तविक जरूरत के आधार पर खाद की खपत का आकलन करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी किसान को उसकी फसल और रकबे के हिसाब से कितनी खाद की आवश्यकता है। इससे जरूरत से ज्यादा खाद की खरीद और अनावश्यक स्टॉक पर नियंत्रण लगाने में मदद मिल सकती है।
घर तक खाद पहुंचाने की भी तैयारी
ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था के अगले चरण में होम डिलीवरी मॉडल पर भी काम किया जा रहा है। इसके लिए अधिक संख्या में वितरण केंद्रों की आवश्यकता होगी। योजना के तहत भविष्य में किसानों के घर तक खाद पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। हालांकि प्रदेशभर में होम डिलीवरी कब से शुरू होगी, इसकी अंतिम तारीख अभी तय नहीं है।
15 अगस्त के बाद प्रदेशभर में लागू करने का लक्ष्य
कृषि विभाग की ओर से किसानों, खाद विक्रेताओं और संबंधित कर्मचारियों को नई व्यवस्था की जानकारी और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 15 अगस्त के बाद प्रदेशभर में ऑनलाइन खाद बुकिंग व्यवस्था शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए केंद्र सरकार की स्वीकृति का इंतजार बताया गया है।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद FFS ऐप खाद की बुकिंग से लेकर ई-टोकन, नजदीकी खाद केंद्र की जानकारी, उपलब्ध स्टॉक और खरीद के रिकॉर्ड तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने, कालाबाजारी पर रोक लगाने और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
