Friday, May 15, 2026
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मेवाड़ में आस्था, संस्कृति और सनातन चेतना का विराट संगम बना घोड़च का श्रीचारभुजानाथ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव

  • प्राण-प्रतिष्ठा, पंचकुंडीय सप्त दिवसीय हरि-हर महायज्ञ, भागवत कथा, विशाल भजन संध्या, छप्पन भोग एवं भव्य भंडारे के साथ भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र
  • अयोध्या रामलला के मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा निर्मित श्रीचारभुजानाथ की दिव्य प्रतिमा बनी श्रद्धा का केंद्र
  • हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन, संतों के सानिध्य एवं आशीर्वाद से गूंजा पूरा मेवाड़

घोड़च, 15 मई। मेवाड़ अंचल का घोड़च गांव सात दिनों तक आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति की दिव्य ज्योति से आलोकित रहा। 8 मई से 15 मई तक आयोजित श्रीचारभुजानाथ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धा, सेवा, सामाजिक समरसता और धार्मिक ऊर्जा का ऐसा भव्य आयोजन बनकर उभरा, जिसकी गूंज पूरे मेवाड़ क्षेत्र में सुनाई दी।
महोत्सव में आसपास के अनेक गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंचे। गांव की गलियां वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन, धार्मिक जयघोषों एवं भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आईं। आयोजन के दौरान पूरे गांव में मेले जैसा दृश्य देखने को मिला तथा हर वर्ग और समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

अभिजीत मुहूर्त में सम्पन्न हुई भगवान श्रीचारभुजानाथ की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा

14 मई को अभिजीत मुहूर्त में भगवान श्रीचारभुजानाथ की प्राण-प्रतिष्ठा वैदिक विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुई। इसी दिन पंचकुंड आत्मक सप्त दिवसीय हरि-हर महायज्ञ की पूर्णाहुति भी श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुई।
महायज्ञ के दौरान रुद्राभिषेक, विष्णु सहस्त्रनाम, जलाभिषेक, अधिवास एवं विभिन्न वैदिक अनुष्ठानों के साथ एक लाख से अधिक आहुतियां दी गईं। यज्ञाचार्यों के सानिध्य में पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्तिभाव से ओत-प्रोत बना रहा।
अयोध्या रामलला के मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा निर्मित प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान श्रीचारभुजानाथ की नई दिव्य प्रतिमा रही, जिसका निर्माण अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला की प्रतिमा बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा किया गया।
प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं आस्था देखने को मिली। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं तथा भक्तों ने इस दिव्य प्रतिमा को मेवाड़ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर बताया।

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संतों के सानिध्य एवं आशीर्वाद से भक्तिमय बना पूरा महोत्सव

महोत्सव में संत अवधेशानन्द चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज, दिगंबर खुशाल भारती महाराज (कुशल भारती जी) सहित अनेक संत-महात्माओं का सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

निरंजनी अखाड़े से जुड़े एवं राष्ट्रीय महाकाल सेना के संस्थापक दिगंबर खुशाल भारती महाराज के आगमन से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। संतों ने धर्म, संस्कार, सेवा, गौ-संरक्षण एवं सामाजिक एकता का संदेश देते हुए युवाओं को सनातन संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान किया।

ज्ञानानंद जी महाराज की भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सागर

महोत्सव के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पूज्य संत ज्ञानानंद जी महाराज के मुखारविंद से प्रतिदिन भागवत कथा की अमृतधारा बहती रही, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, धर्म, भक्ति एवं सनातन संस्कृति के महत्व का सुंदर वर्णन किया गया। कथा पंडाल में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही तथा पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर नजर आया। श्रद्धालु देर रात तक कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करते रहे।

भगवत सुथार की भक्तिमयी प्रस्तुतियों ने बांधा समां

विशाल भजन संध्या में प्रसिद्ध भजन गायक कलाकार भगवत सुथार ने अपनी मधुर आवाज एवं भक्तिमयी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते और नृत्य करते नजर आए।
भगवत सुथार ने श्रीचारभुजानाथ एवं भगवान भोलेनाथ की महिमा से जुड़े भजनों की शानदार प्रस्तुतियां देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “जय श्रीचारभुजानाथ” एवं “हर-हर महादेव” के जयघोषों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

बाल भजन गायक तिलकेश सुथार ने जीता श्रद्धालुओं का दिल

भजन संध्या में बाल भजन गायक कलाकार तिलकेश सुथार की प्रस्तुतियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। अपनी मधुर आवाज, ऊर्जावान शैली एवं भक्ति से ओत-प्रोत भजनों के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
तिलकेश सुथार के भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए। छोटी उम्र में उनकी अद्भुत प्रस्तुति एवं संगीत प्रतिभा को देखकर श्रद्धालुओं ने जोरदार तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।

भगवान श्रीचारभुजानाथ के नगर भ्रमण में उमड़ा जनसैलाब

13 मई को भगवान श्रीचारभुजानाथ का भव्य नगर भ्रमण निकाला गया। शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। गांव में जगह-जगह पुष्पवर्षा, स्वागत द्वार एवं धार्मिक जयघोषों के साथ भगवान का स्वागत किया गया।
नगर भ्रमण के दौरान युवा, महिलाएं एवं बच्चे नृत्य एवं भजन-कीर्तन करते हुए भक्ति में लीन नजर आए। पूरा गांव धर्म और उत्सव की जीवंत तस्वीर बन गया।

छप्पन भोग एवं विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

महोत्सव के दौरान भगवान श्रीचारभुजानाथ को भव्य छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके साथ ही विशाल ग्राम भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
मुख्य दिवस पर लगभग 15से 17हजार श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद प्राप्त कर धर्मलाभ लिया। आयोजन समिति एवं ग्रामीणों द्वारा सेवा भाव से की गई व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

गणेशजी, हनुमानजी एवं शिव परिवार की हुई स्थापना

धार्मिक आयोजन के अंतर्गत गांव के मुख्य चौराहे पर भगवान श्रीगणेशजी एवं संकटमोचन हनुमानजी की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा भी वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुई।
इसके साथ ही श्रीचारभुजानाथ मंदिर में शिव परिवार की स्थापना भी श्रद्धापूर्वक की गई। पूरे आयोजन में वैदिक परंपराओं एवं सनातन संस्कृति की भव्य झलक देखने को मिली।

ज्वारा विसर्जन के साथ सम्पन्न हुआ भव्य महोत्सव

15 मई, शुक्रवार को ज्वारा विसर्जन कार्यक्रम श्रद्धा एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से ज्वारों का विसर्जन किया। इसके पश्चात सभी भक्तों में प्रभु श्रीचारभुजानाथ का प्रसाद वितरित किया गया।

युवाओं, मातृशक्ति एवं ग्रामवासियों के सहयोग से बना आयोजन ऐतिहासिक

महोत्सव की सफलता में गांव के युवा साथियों, मातृशक्ति, बड़े-बुजुर्गों एवं समस्त समाज के लोगों का विशेष योगदान रहा। सभी ने तन, मन एवं धन से सहयोग प्रदान कर आयोजन को ऐतिहासिक एवं यादगार बनाया।
व्यवस्थाओं से लेकर भंडारे, नगर भ्रमण, कथा, यज्ञ एवं धार्मिक आयोजनों तक हर कार्य में ग्रामीणों का समर्पण और सेवा भावना देखने को मिली। आयोजन समिति ने समस्त श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं एवं ग्रामवासियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।

घोड़च गांव का यह भव्य धार्मिक आयोजन अब मेवाड़ क्षेत्र में आस्था, संस्कृति, सामाजिक समरसता और सनातन परंपरा की प्रेरणादायी मिसाल बन चुका है।

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