नई दिल्ली। प्रशांत महासागर में सक्रिय एल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है। अमेरिका की नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने चेतावनी दी है कि यह 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली एल नीनो बन सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ सकता है।
मुख्य बातें
81% संभावना है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच एल नीनो बहुत मजबूत रूप ले लेगा।
यह 1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली एल नीनो बन सकता है।
एल नीनो के कारण भारत में सामान्य से कम मानसून और सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है।
2°C से ऊपर गया तो
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बारिश कम हो सकती है। एल नीनो के प्रभाव से हीटवेव, सूखा और चरम मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
वर्तमान में नीनो 3.4 इंडेक्स 1.2°C तक पहुंच चुका है। यदि यह 2°C से ऊपर जाता है तो इसे अत्यंत शक्तिशाली एल नीनो माना जाएगा। पिछला सबसे मजबूत एल नीनो 2015-16 में आया था, जिसके दौरान भारत में मानसून सामान्य से काफी कम रहा था।
एल नीनो क्या है?
एल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक बढ़ जाने की स्थिति है। यह ENSO (एल नीनो-सदर्न ऑस्सीलेशन) चक्र का हिस्सा है। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है और कहीं सूखा तो कहीं भारी बारिश देखने को मिलती है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मजबूत एल नीनो का सबसे बड़ा असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है। इससे बारिश सामान्य से कम हो सकती है, जिससे खेती, जलाशयों और जलापूर्ति पर असर पड़ने की आशंका रहती है। यदि एल नीनो और मजबूत हुआ तो आने वाले महीनों में कई राज्यों में वर्षा की कमी देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों की राय
वैज्ञानिकों के अनुसार, पूर्वी प्रशांत महासागर में लगातार बढ़ता तापमान और कमजोर होती ट्रेड विंड्स एल नीनो को और अधिक ताकत दे रही हैं। मौजूदा एल नीनो जून में शुरू हुआ है और इसके प्रभाव के 2027 तक बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
