Tuesday, July 14, 2026
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क्या 7 दिनों के बाद देश का इतिहास बदलने वाला है? क्या लोकसभा की सीटें 850 होने जा रही हैं?

  • महिला आरक्षण के साथ क्या परिसीमन पर सबसे बड़ा ऑपरेशन 360 शुरु?
  • बिटोड़ा एक्सप्लेनर

घनेन्द्र सिंह सरोहा

नई दिल्ली। 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने महिला आरक्षण को वर्ष 2029 से लागू करने और लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 तक करने से जुड़े नए संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। अप्रैल में आयोजित विशेष सत्र के दौरान यह विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया था।


भाजपा सूत्रों के अनुसार, सरकार तभी नया संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद में पेश करेगी, जब उसे इसके पारित होने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित हो जाएगा।

लोकसभा में संख्या बढ़ाने की रणनीति


सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का भरोसा दिया है, जबकि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसद एनडीए सहयोगी शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। यदि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इन दल-बदल को मान्यता देते हैं, तो लोकसभा में एनडीए की संख्या वर्तमान 293 से बढ़कर 329 हो सकती है।


हालांकि, यदि सदन में सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए 360 मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में भाजपा अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) सहित अन्य विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है। पार्टी को उम्मीद है कि कुछ गैर-एनडीए सांसद मतदान के दौरान अनुपस्थित रह सकते हैं या मतदान से दूरी बना सकते हैं।

कांग्रेस का आरोप


कांग्रेस महासचिव (संगठन) और वरिष्ठ सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग, दलों में टूट कराने और सांसदों को विभिन्न प्रस्ताव देने के बावजूद भाजपा इस संवैधानिक संशोधन विधेयक को जबरन पारित नहीं करा पाएगी।

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उन्होंने कहा कि विपक्षी दल भाजपा के प्रयासों को लेकर गंभीर हैं और सरकार अपने प्रयासों में सफल नहीं होग

डीएमके से बातचीत


भाजपा नेतृत्व की डीएमके के साथ भी बातचीत जारी है। सत्ता पक्ष को उम्मीद है कि यदि डीएमके विधेयक के पक्ष में मतदान नहीं भी करती, तो कम से कम मतदान से दूरी बना सकती है।
हालांकि डीएमके ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस द्वारा विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के साथ सरकार बनाने के बाद डीएमके ने लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने की मांग भी की है।


डीएमके पहले परिसीमन का विरोध कर चुकी है। पार्टी का कहना रहा है कि यदि केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया तो दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।


डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने पार्टी नेतृत्व से संपर्क किया है और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अपनी चिंताएं सरकार के सामने रख दी हैं और उम्मीद है कि सरकार सकारात्मक समाधान लेकर आएगी।


डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने भी स्वीकार किया कि सरकार और उनकी पार्टी के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के हितों की रक्षा होनी चाहिए और राज्य को जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।

विपक्षी दलों से संपर्क जारी


भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार क्षेत्रीय दलों और विपक्ष के कई सांसदों के संपर्क में हैं। इनमें समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कुछ सांसद भी शामिल हैं।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में विधेयक पेश नहीं करेगी और पहले पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित किया जाएगा।

एनसीपी (शरद पवार गुट) से भी बातचीत


भाजपा एनसीपी (शरद पवार गुट) का समर्थन पाने के लिए भी बातचीत कर रही है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि पिछली राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें इस दल पर पूरी तरह भरोसा नहीं है।


एक भाजपा नेता ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व शरद पवार का सम्मान करता है, लेकिन पहले अंतिम समय में रुख बदलने के अनुभव भी रहे हैं।

कांग्रेस की चिंता


कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि भाजपा जल्द ही आवश्यक संख्या जुटा सकती है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष बिना संघर्ष के ऐसा नहीं होने देगा।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि विपक्ष डीएमके के साथ लगातार संपर्क में है ताकि अप्रैल विशेष सत्र की तरह विपक्ष की एकजुटता बनी रहे। उन्होंने याद दिलाया कि डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने ही परिसीमन विधेयक के विरोध का नेतृत्व किया था।

विजय का बयान


तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हाल ही में करूर में आयोजित एक जनसभा में कहा कि परिसीमन विधेयक दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व को कमजोर करेगा और तमिलनाडु के केंद्रीय संसाधनों में हिस्से को भी प्रभावित करेगा।
विपक्षी नेताओं का मानना है कि यदि डीएमके अब अपना रुख बदलती है तो यह विजय के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

अप्रैल में क्यों हार गया था विधेयक?
अप्रैल 2026 के विशेष सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया था। इसका उद्देश्य विस्तारित लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना तथा परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था।


उस समय लोकसभा में उपस्थित 528 सांसदों में से 298 ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया था, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। इस कारण विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं कर सका।


यदि डीएमके के 22 सांसद मतदान से दूर रहते हैं और बाकी सभी सदस्य मतदान करते हैं, तो सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए 346 मतों की आवश्यकता होगी। भाजपा का मानना है कि यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

सरकार का नरम रुख


भाजपा सूत्रों का कहना है कि 130वें संवैधानिक संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा मंत्रियों को गंभीर अपराधों में 30 दिन की हिरासत के बाद पद से स्वतः हटाने के प्रावधान को संशोधित कर केवल “निलंबन” तक सीमित करने का फैसला विपक्ष के प्रति सरकार के नरम रुख का संकेत माना जा सकता है।


जेपीसी ने अपनी प्रारूप रिपोर्ट में यह भी जोड़ा है कि यदि आरोपी बरी हो जाता है, आरोपमुक्त हो जाता है या तय समय में अभियोजन विफल रहता है तो निलंबन स्वतः समाप्त हो जाएगा। इसका उद्देश्य विपक्ष द्वारा कानून के संभावित दुरुपयोग संबंधी उठाई गई चिंताओं को दूर करना है।


भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार पारदर्शिता बनाए रखते हुए विपक्ष की कुछ मांगों को स्वीकार करने का संदेश देना चाहती है, ताकि अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेषकर परिसीमन विधेयक, पर भी सहयोग मिल सके।

राज्यसभा की स्थिति


राज्यसभा में भाजपा के वर्तमान में 114 सदस्य हैं। पश्चिम बंगाल से होने वाले तीन उपचुनावों में जीत के बाद यह संख्या 117 हो जाएगी।
इसके साथ ही 245 सदस्यीय राज्यसभा में एनडीए की कुल संख्या बढ़कर 155 होने की संभावना है, जो दो-तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक 164 सदस्यों से अभी भी नौ कम होगी।

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