- घनेन्द्र सिंह सरोहा
नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी जी लिमिट तो सारी टूट चुकी हैं। अब आखिरी मौका है। फिर आपसे उम्मीद नहीं रखेंगे। क्योंकि आपने कश्मीर, राम मंदिर, सर्जिकल स्ट्राइक पर तो अच्छा काम किया है। सड़कें। रेल। पुल हाईवे भी बना रहे हो। दुनियाभर में भी वाह-वाही लूट रहे हो। लेकिन घर में पिट रहे हो। और बुरी तरह पिट रहे हो। और कितने मौके दें। चलो आप नोट करो। मैं गिनाता हूं। पहला। सड़क पर विरोध के चलते 3 कृषि कानून की वापस ले लिए। दूसरा, शाहीन बाग का दबाव देखा तो NRC से हाथ खींच लिए। तीसरा, राम मंदिर आपके भरोसे छोड़ा था। वहां धृतराष्ट्र बने बैठे रहे। चौथा, कन्हैया को अभी तक न्याय नहीं लिया। भूल गए होंगे आप तो और जनता जनार्दन आप लोग भी। याद दिलता हूं….जिसका सर धड़ से अलग किया गया था। वह राहु बनकर अभी भी इस देश काल के सिर पर मंडरा रहा है। पांचवा…इथेनोल का खेल। जनता को बिना विश्वास में लिए एकतरफा पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाते रहे। अब सिर पिट रहे हो। लिस्ट बहुत लंबी है लेकिन आप मानोगे तो हो नहीं और ना ही आपके भरोसे बैठी जनता। लेकिन मोदी जी विश्वास अब यहां डगमगा गया है। सीजेपी पर डगमगा गया है। आंदोलन रांची में भी हुआ। लेकिन जिस तरह से आपने इन तिलचट्टों के आगे घुटने टेके हैं। वह किसी भी सरकार के लिए लानत है। धिक्कार है। बेहयायी है। कोई कह सकता है कि 140 करोड़ की आबादी का नेतृत्व करने वाले एक राष्ट्र का नेता एक अदने से तिलचट्टे के आगे घुटने टेक देगा। आपने किया और बड़ी ही बेशर्मी के साथ किया।
तिलचट्टों ने इंडिया गेट ही क्यों चुना…2012 का निर्भया प्रोटेस्ट सर्च करो
चीनी 65 रुपये हो गई है। सरकार संसद में परिसिमन बिल पास नहीं करा पाई। महिला आरक्षण, FCRA बिल पास नहीं करा पाई। सबको भूल जाइए। देश का इकबाल रहेगा। तो ये सब पास होते रहेंगे। मसला यह है कि तिलचट्टों ने एक बार फिर से मोदी सरकार को घुटनों पर लाने की तैयारी कर ली है। 5 सितंबर को दिल्ली पर चढ़ाई का ऐलान किया है। और इस बार उन्होंने जगह बहुत सोच-समझकर चुनी है। इंडिया गेट। जेन जी और जेन एल्फा को तो याद नहीं होगा। क्योंकि जब वे इस दुनिया में जन्म ले रहे थे तब वर्ष 2012 में निर्भया आंदोलन के नाम पर इन्हीं वामपंथी, लेफ्टिस्ट, जेएनयू, आइसा विचारधारा वाले, देश तोड़ने की विचारधारा वाले लोगों ने शांतिमार्च के नाम पर इंडिया गेट से लेकर राष्ट्रपति भवन की ओर जाने वाले राजमार्ग अब कर्तव्य पथ पर 15 दिन तक जो तांडव मचाया था। उसे सोचकर भी मन कांप उठता है। जेन जी और जेन अल्फा आप लोग यह मानते हो कि आंदोलन के नाम पर ड्रामा और गाली गलोज करना आपको ही आता है तो यूट्यूब में 2012 निर्भया प्रोटेस्ट या निर्भया आंदोलन सर्च कर लेना। सारे वीडियो मिल जाएंगे। बेहयाई के। हुड़दंग के। और सत्यानाश के। उस जमाने में कांग्रेस के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की बहुत ही कमजोर कठपुतली सरकार थी। जिसकी डोर सोनिया गांधी की सुपर कैबिनेट नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के पास थी।
रांची ने बताया 140 करोड़ देश की आबादी का कैसे किया जाता है नेतृत्व
लेकिन मोदी सरकार जिस तरह से 25 जुलाई को तिलचट्टों के सामने झुकी तो उसने स्वर्ग में बैठे मनमोहन सिंह जी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया होगा कि मेरी कमान तो सोनिया गेंडी के पास थी। आप क्यों घबरा गए। एक अदने से तिलचट्टे से जो कल तक जंतर-मंतर पर एक ASI पुलिस कर्मी के पैरों में नाक रगड़कर टेंट लगाने की भीख मांग रहा था। आप तो कांग्रेस के सहारे पर टिकी झारखंड की हेमंत सरकार से भी कमजोर निकले जिसने ठीक इसी समय बताया कि छात्र आंदोलन से कैसे निपटा जाता है। बता दिया और करके दिखा भी दिया। मैं छात्र आंदोलन के खिलाफ नहीं हूं। छात्र आंदोलन होने चाहिए। हेमंत सरकार ने जो किया वह एक सरकार का काम होता है। छात्रों को और जोर लगाना चाहिए। अपनी बातों को मनवाने के लिए। लेकिन मैं इस रवैय्ये के खिलाफ जरूर हूं कि 140 करोड़ की आबादी के नेतृत्व करने वाला राष्ट्र का नेता एक तिलचट्टे के आगे नतमस्तक हो जाए।
मोदी जी चुनाव जितने में माहिर, लेकिन सोशल मीडिया और सड़क पर कमजोर
और मोदी सरकार की कमजोरी की वजह से ही जो तिलचट्टा राजस्थान के जयपुर, जोधपुर में लोगों के हाथों कई बार पीट चुका हो उसकी यह हिम्मत हो गई है कि वह मोदी सरकार को एक बार फिर चैलेंज कर रहा है। तिलचट्टों, कांग्रेस, वामपंथी और देश विरोधी ताकतों को अच्छे से पता है कि मोदी का फार्मूला चाहे चुनाव जीत ले जाता हो लेकिन वह सड़क और सोशल मीडिया की लड़ाई में कमजोेर है। और भाईयों आपको पता होना चाहिए इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और एक्स चलाने वाली सारी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियां अमेरीकी हैं। और अमेरीका हमेशा चाहेगा कि दिल्ली में हर समय कमजोर सरकार रहे। मोदी सरकार यह बात अच्छे तरीके से जानती है। मोदी व्यक्तिगत रूप से और यह हमारा देश भी अच्छे तरीके से जानता है कि उसके प्रधानमंत्री का सेल्फी वीडियो अभी 1 महीने पहले ही इंस्टाग्राम, फेसबुक चलाने वाली कंपनी मेटा ने कुछ घंटों के लिए हटा दिया था। नरेन्द्र मोदी जी ने क्या कर लिया उनका।
देश विरोधी ताकतें मेटा और गूगल के हथियारों के साथ एक बार फिर से 5 सितंबर को मोदी सरकार को सड़क से चैलेंज करने जा रही है। बिरयानी बांटने वाले भी इंतजार में बैठे हैं।
और मोदी जी मैं आपको साफ बता रहा हूं अगर आपने इन तिलचट्टों और देश विरोधी ताकतों को उनकी औकात नहीं दिखाई और आपने 2012 में निर्भया आंदोलन के नाम पर इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक गदर होने दिया तो तय मानियेगा कि …आप 2029 का राजनीतिक सवेरा नहीं देख पाएंगे।
आज की बात यहीं तक। अगर आपको यह विश्लेषण सही लगा और आप देश के मुद्दों पर निडर आवाज का समर्थन करते हैं, तो इस वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें। चैनल पर नए हैं तो सब्सक्राइब करना न भूलें।
नमस्कार। जय हिंद। जय हिन्दुस्थान!
