Tuesday, August 11, 2026
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UPI पर लगेगा चार्ज? ₹2,000 का क्या है मामला? अमेरिका, Visa-Mastercard और मोदी सरकार की पूरी कहानी

घनेन्द्र सिंह सरोहा

नई दिल्ली। मैं इधर-उधर की घुमाकर नहीं पूछता हूं। सीधे पूछता हुं। सरकार से। मोदी सरकार से। क्या UPI से एक्स्ट्रा् पेमेंट काटोगे। सरकार कह रही है कि नहीं काटेगे। लेकिन यह होगा। सरकार चाहे कितनी ही रोक लगा दे। कह दे कि इतने पर पैसा नहीं लगेगा। उतने पर पैसा नहीं लगेगा। लेकिन वे देश के व्यापारियों को नहीं जानती। जब उनकी जेब से पैसा जाएगा तो वे जनता की जेब से ही काटेंगे। सरकार चाहे कुछ कर ले। एक तरफ तो सरकार डिजिटल पैमेंट बढ़ाने की बात करती है दूसरी तरफ इसपर टेक्स लगाने की तैयारी कर रही है। जी हां में सही कह रहा हूं। नमस्कार। मैं घनेन्द्र सिंह सरोहा।


सरकार ने इसको लेकर अभी चार दिन पहले ही 4 अगस्त को लोकसभा में बिल पास किया है। इसमें कहा गया है कि बैंक और गूगल, पेटीए जैसी कंपनियां व्यापारियों से QR कोड स्कैनिंग से पैसे का लेन-देन करने पर टेक्स वसूल सकेंगी। यह .3 से .6 प्रतिशत भी हो सकता है। या फिर .03 से .07 प्रतिशत भी हो सकता है। यह अभी तय नहीं हुआ है। लेकिन सरकार साफ कर रही है कि आम-आदमी से नहीं लिया जाएगा।


कुछ बात की जा रही है। 2000 रुपये की। अगर आपने 2000 रु. से कम की खरीदारी की है तो टेक्स नहीं लगेगा। उससे ऊपर की करोगे तो लगेगा। सरकार का कहना है कि अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनयों से आप जो ऑनलाइन खरीदारी गूगल पे या फोन पे जैसी अमरीकी कंपनियां के द्वारा करते हो उसके प्रोसेसिंग की फीस काफी हद तक सरकार को भरनी पड़ती है। इसमें बैंक और यूपीआई कंपनियों का भी हिस्सा रहता है लेकिन सबसे ज्यादा भार सरकार पर आता है।


और बीते साल के आंकडों पर नजर डालें तो यह करीब 20 हजार करोड़ रुपये बैठता है जो सरकार को भरना पड़ता है। या यूं कह लीजिए इस पूरे तंत्र को चलाने के लिए सरकार को इतने हजार करोड़ रु. की सब्सिडी देनी पड़ती है। वालमार्ट की गूगल पे, फोन पे जैसी अमरीकी कंपनियों को भी जो कि इस हालत में हैं कि वे व्यापारियों से पैसे लेकर सरकार को दे सकती है।

अब यहां एक नया पैंच और चल रहा है। अमेरिका कह रहा है कि मोदी सरकार ने यूपीआई और रूपे को इतना सपोर्ट किया कि उनकी कंपनियों वीजा और मास्टरकार्ड का भट्टा बैठ गया। 2016 से पहले उनकी दुकानदारी बढ़िया चल रही थी। मोदी सरकार 11 अप्रेल 2016 को QR कोड से स्केन करने क्या लाई उनके प्लास्टिक के कार्ड दुकानों पर, माल में, पेट्रोल पंपों पर बंद हो गए। आज यह स्थिति है कि देश में हर साल करीब 24000 करोड़ ट्रांजेक्शन होंते हैं। जिसमें करीब 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर का लेन-देन होता है। यही सब कमाई इन प्लास्टिक की करेंसी वाली कंपनियों की मारी गई।


कांग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश का कहना कि अमेरिकी की वीजा, मास्टर कार्ड जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार यह बिल लेकर आई है। हमारी वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण का कहना है कि ऐसा नहीं है। हमपर जो 20 हजार करो़ड़ रुपये का भार हर साल इस तंत्र को चलाने का पड़ रहा था उसकी भरपाई करने के लिए यह बिल लाए है। और इससे आम आदमी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह व्यापारियों से लिया जाएगा।


विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार जो हमारे साल भर में 24 हजार करोड़ बार ट्रांजेक्शन होता है उसमें से 2000 रु. से कम लेन-देन वाले 96 प्रतिशत हैं। लेकिन इन 2000 से ऊपर वाले 4 प्रतिशत मेें दो-तिहाई लेन-देन होता है जो करीब सवा दो लाख करोड़ रु. के आस-पास पहुंचता है। कहने के मतलब है कि जो बड़े खरीददार हैं वे भी QR कोड की फ्री की सर्विस ले रहे है। जबकि उनकी ऐसी हैसियत है कि वे इसे भर सकते हैं। ऐसे में इस प्रोसेस पर टैक्स लगेगा तो दो पैसे सरकार के पास आएंगे। तभी इस पैसे का उपयोग सरकार इस स्केनिंग सिस्टम को और गांव-गांव तक पहुंचा पाएगी।


हालांकि QR कोड गांव-गांव तक तो पहुंच चुका है। सरकार और कहां पहुंचाएगी। यह तो पता नहीं लेकिन इतना तो सही है इस पूरे तंत्र को चलाने में। इसमे गड़बड़ी नहीं हो। लोगों के साथ धोखा नहीं हो। हरेक की केवाईसी मेंटेन रखना। इनसब में पैसा तो लगता ही है जो सरकार करीब 20 हजार करोड़ रुपये सालाना बता रही है। इसकी भरपाई तो करनी ही होगी।
लेकिन समस्या क्या है पता है। शुरू में यह बड़े व्यापारियों पर लगेगा। और सरकार भी बड़े व्यापारियों पर ही लगाएगी लेकिन होगा क्या आपके पड़ोस का दुकानदार, सब्जी वाला, चाय वाला सब इसमें शामिल हो जाएंगे। और वसूलने लग जाएंगे। अब आप कहां-कहां किस किसका मुंह पकड़ेंगे। आप एक-दो या 10 रु के लिए झगडा तो करोगे नहीं बस आगे बढ़ोगे। क्योंकि आजकल तो 10 रुपये से कम में तो भिखारी भी भीख नहीं लेता।


इसलिए सरकार चाहे कितना भी मना कर ले। लेकिन यह रिस कर तो नीचे तक आएगा ही। और आम जनता की ….पब्लिक की जेब कटेगी ही। चाहे आप कितने भी जतन कर लो। क्योंकि एक बार डीजल के दाम बढ़ जाते हैं तो ऑटो वाले, 7 सीटर टेम्पो वाले, प्राइवेट बस वाले तुरंत पैसा बढ़ा देते हैं। फिर आप दाम कम भी कर दो वैट-वूट हटाकर वे कम नहीं करते।


देखते हैं ई 20 के बाद मोदी सरकार के QR कोड गले की फांस बनेगा। वह किसान आंदोलन में फंसी है। ई 20 में फंस रही है। और अब यह QR कोड। सरकार की प्रोबलम पता है क्या है। वह अपनी बात लोगों तक पहुंचा ही नहीं पा रही है। पता नहीं सत्ता में आते ही सबको लकवा क्यों लग जाता है। जब कांग्रेस सत्ता में थी तब उसका भी यही हाल था। और अब बीजेपी। पता नहीं कुर्सी में ही कुछ गड़बड़ है। ऐसी के कमरों से ना मंत्री बाहर निकलना चाहते हैं और ना ही कार्यकर्ता। वही हिन्दुत्वाद और राष्ट्रवाद का झंडा पकड़े हुए हैं। नीट प्रदर्शन में अपनी झंड पिटवा चुके हैं। आगे भी यही करेंगे। जय हो मोदी बाबा की। वीडियो पसंद आया हो तो लाइक कीजिएगा। नहीं तो कोई बात नहीं। अगली बार और बढ़िया बनाएंगे। जय हिंद। जय भारत।

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