घनेन्द्र सिंह सरोहा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। ऐसा उन्होंने क्यों किया। यह तो वे ही बता सकते हैं। अपनी समझ से तो बाहर है। अपने को तो सीधा-सीधा दिखाई दे रहा है कि उन्होने बर्र के छत्ते में हाथ दे दिया है। अब आए दिन कोई ना कोई बवंडर सीधे उनकी तरफ आता दिखाई देगा। वो इससे कैसे निपटेंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
फ्रेंड्स जो कुछ भी हुआ। वह ठीक नहीं हुआ। पीएम मोदी और उनकी टीम ने ठीक नहीं किया। और कुछ नहीं तो पी एम मोदी ऐसे बच्चों के सामने झुक गए जिनसे किसी भी छोटे शहर की युनिवर्सिटी का वाइस चांसलर रोज निपटता हो। कोई जरूरत ही नहीं थी। जो चिलगोजा कल तक एक अदने से पुलिस वाले के पैरों में लौटा हुआ था। तिरपाल की भीख मांग रहा हो। उसके सामने पूरी सरकार झुक जाए। वह भी ऐसी सरकार जिसका डंका पूरी दुनिया में बजता हो।
ऐसे तो आंदोलनों की लाइन लग जाएगी। आपने अलगाववादी और देश तोड़ने वाली विदेशी ताकतों को क्या मैसेज दिया है। कि 5-10 हजार लोगों की भीड़ लेकर जाओ। संसद में घुसने की धमकी दो। और अपनी बात मनवा लो। ऐसे चलेगा देश। तो हो लिया। फिर तो।
READ MORE : राजस्थान में 24,712 सफाई कर्मचारियों की संविदा भर्ती, 15 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन
अब ई 20 मूवमेंट की तैयारी
हिन्दुस्तान में समस्याओं की कोई कमी नहीं है। ई 20 तो सबसे ज्यादा हिट लिस्ट में है जो जनता से सीधे रूप से जुड़ा हुआ है। मास आंदोलन के नाम पर आपने घुटने टेके हैं ना….. तो यह भी मास आंदोलन ही होगा। तैयार रहना। ब्राह्मणवाद और अगड़ों के खिलाफ जो नारे लगे थे तो अब इसपर भी तैयार रहना आरक्षण हटाओ मूवमेंट भी तैयार हो रहा है।
किसान अमरीका-भारत की प्रस्तावित डील के खिलाफ दिल्ली घेरेंगे। राम मंदिर चोरी का मुद्दा कभी भी जनान्दोलन में तब्दील हो सकता है। मजदूर, सेना, पुलिस भर्ती, निजी स्कूल फीस, प्राइवेट अस्पतालो की लूट। सब हिट लिस्ट में हैं। किसी भी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा हो सकता है। क्योंकि यह हरेक मुद्दा देश की 140 करोड़ की आबादी से जुड़ा हुआ है। बेरोजगारी भी बीते 15 महीनों में करीब ढाई गुणा बढ़कर अलार्मिंग 16 प्रतिशत तक पहुंच गई है। क्या करोगे। कैसे सामना करोगो इन तरह तैयार होते बवंडरों का।
वामपंथी, अलगावादी, खालिस्तानी और देश तोड़ने वाली विदेशी और अन्दरूनी ताकतें इनको भड़काने के लिए पहले से ही इंतजार में बैठी हैं। और इन सबके निशाने पर होंगे आप। कैसे निपटोगे। बच्चों से तो निपट नहीं सके। बड़ों से कैसे निपटोगे।
किसान आंदोलन को नहीं भूले हैं लोग
सोचते हो कि लोग जंतर-मंतर के इस आंदोलन को भूल जाएंगे। जैसे लोग किसान आंदोलन को भूल गए। सबको याद है कि कैसे आज से 5 साल पहले 2021 में गणतंत्र दिवस के दिन ही जब आप कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड का आनंद ले रहे थे ठीक तभी कथित किसान आंदोलन के नाम पर हजारों की तादाद में अराजकतावादी लोगों ने दिल्ली की सड़कों पर ट्रेक्टरों से ताडव मचा लाल किले की प्राचीर पर निशाने साहिब फहरा दिया था। लोग भूलते नहीं है। उन्हें सब याद रहता है।
अब हर दूसरे दिन दिल्ली घेरेंगे लोग
दरअसल 5 साल पहले हुए किसान आंदोलन और अब के काक्रोच आंदोलन में जमीन आसमान का फर्क है। एरिया और टाइम दोनों के पैरामीटर पर। किसान आंदोलन में किसान नेताओं के दावे के अनुसार 700 से 750 किसानों की मृत्यु हुई। इसका प्रभाव क्षेत्र केवल पंजाब और पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के कुछ हिस्सों तक ही सीमित रहा। लेकिन काक्रोच ने बिना कोई शहादत दिए 70 दिन में खासौतर पर 20 जुलाई के बाद 5 दिन में ही मोदी सरकार को घुटने पर ला दिया। किसान आंदोलन के विपरित काक्रोच का फैलाव केवल पंजाब तक नही बल्कि पूरे देश भर में था। युवाओं में था। और सबसे बड़ी बात सरकार डर गई थी। इसलिए मोदी सरकार इसको और आने वाले तूफानों को किसान आंदोलन की तरह ना देखे। अब ये तूफान 5-5 साल के गैप में नहीं आएंगे। एक खत्म होगा नहीं कि दूसरा सिर पर खड़ा हो जाएगा। अब झेलते रहना। देखते हैं कहां तक झेलोगे।
क्योंकि अब आम संगठनों को भी यह महसूस होने लगा है कि हां दिल्ली के किले को डिजिटल सोशल मीडिया पर सवार होकर ब्लेकमेल और अपने आपको असहाय, बेचारा बताकर ढहाया जा सकता है। इसके लिए उन्हें जेन जी, जेन एल्फा व महिलाओं को आगे करना है। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों जगह। वे तैयारी में लग गए हैं। दिल्ली पर चढ़ाई करने के लिए।
भागवत जी जैन जी ‘डिस्कशन’ नहीं, मोबाइल स्क्रीन को समझती है
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस्तीफे से एक दिन पहले एक कार्यक्रम में कहा था कि जेन जी को डिक्टेट मत करो। डिस्कस करो। डिस्कस कहां कर रहे हो भाई। तुम लोगों ने उनकी वो शर्तें भी मान ली जिसपर उन्हें खुद यकीन नहीं था। कल तक जो एक एएसआई के पैरा में पड़कर तिरपाल की भीख मांग रहा था उसके पैरों में मोदी सरकार पड़ी हो उसने तो उसके फरिश्तों ने भी सपने में नहीं सोचा होगा। यह डिस्कस करने वाली जेनरेशन नहीं है। यह एल्गोरिथम पर सवार होकर बहने वाली जेनरेशन है। यह पल में पलटती है। बस एलगोरिथम बदल दो। यह बदल जाएगी।
सुरक्षा बलों के खिलाफ मुकदमों की तैयारी, तो आपको अगली बार कौन बचाएगा
आप लोगों ने जेन जी से तो सो काल्ड डिस्कशन कर लिया… उस पढ़ी लिखी कंपटीटिव एक्जाम से क्वालिफाईड जेनरेशन एक्स और मिलेनियल्स का क्या जो वर्दी में सामने से आते पत्थर, चाकू, बोतलों और सैंकड़ों लात-घूसों का मुकाबला हाथ में एक डंडा लेकर आपके आर्डर फोलो कर रही थी। और अब इसी जेन जी मांगों के अनुसार मुकदमें भी झेलेंगे। सरकार इनसे अपना तख्ता पलटने के सपने से इतना बौखलाई हुई है कि इन्होंने आंदोलन की फिर से धमकी क्या दी बिहार, आसाम की सरकार ने नीट उपद्रवकारियों के मुकदमे वापस लेने की घोषणा कर दी। जब पुलिस, सुरक्षा बलों के सिुर फोड़ने वालों के खिलाफ मुकदमे ही नही होंगे तो क्या आपकी फोर्सेस अगली बार संसद की ओर बढ़ते कदमों को रोकने के बारे में उसी शिद्दत से सोचेगी जो उसने इस बार किया। बिल्कुल नहीं। इसलिए अब दोहरी मार रहेगी। भीड़ के बढ़ते कदम और उनको रोकने का दिखावा करती फोर्स। संभलकर रहियेगा।
और इस सब में भीड़ के साथ आपको हमेशा वामपंथी और अलगाववादी मोदी और उसकी सरकार को गाली देते हुए मिलेंगे। जेन जी और एल्फा के रील वाले कल्चरल इवेंट तो साथ होंगे ही।
अब जानें सरकार के आर्ग्यूमेंट
अब चलो तुम्हारे आर्ग्यूमेंट भी सुन लेते हैं…कि किन वजहों से तुमने विदेशी एकगोरिथम की पैदाइश छुटभैय्ये तिलचट्टों के सामने सरेंडर कर दिया और अभी भी लगातार करते जा रहे हो…
आप लोगों को आर्ग्यूमेैंट है कि काक्रोच ने फिर से संसद पर चढ़ाई की धमकी दी थी। और इस बार भी अराजक और अलगावादी तत्वों के साथ मिलकर वे दिल्ली में तोड़-फोेड़ आगजनी के अलावा देश के अन्य हिस्सों में ही ऐसा ही करने की तैयारी कर रहे थे। भाईसाहब, यह स्थिति तो हर बार बनेगी। तब क्या हर बार सरेंडर करोेगे। क्योंकि अगली बार जो भी दिल्ली पर चढ़ाई करेगा वह इतना तो जानता ही होगा कि पूरे देश में सरकार के खिलाफ कैसे आग भड़काई जा सकती है।
राहुल के पीएम आवास के बाहर आह्वान से घबरा गए?
राहुल ने पीएम मोदी के आवास के सामने देशभर के लोगों को वहां आने की अपील की थी। उनका और 25 साल से कांग्रेस, वामपंथी और अलगाववादियों का करीबी आंदोलन जीवी उर्फ योगेन्द्र यादव उर्फ सलीम लोकतंंत्र विरोधी बयान जारी कर चुका था कि देश में सत्ता का रास्ता अब चुनाव लड़कर नहीं संघर्ष करके हासिल किया जाएगा। साफ है कि यह भाषा नक्सलियों की है जिनका देश की लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया में कोई विश्वास नहीं है। राहुल के आह्वान से आपको डर था कि देश का युवा नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका की तरह पीएम आवास, संसद पर चढ़ाई कर देगा। राहुल में इतना ही दम होता तो वह अपने दम पर एक सरपंच का चुनाव जीत चुका होता।
मानसून सत्र को बचाने के लिए यह सब किया ?
तीसरा आपका तर्क यह था कि मौजूदा संसद सत्र में लोकसभा सीट परिसीमन, महिला आरक्षण, एफसीआरए जैसे महत्वपूर्ण बिल पास कराने थे। इसलिए उनकी बात मानी। क्योंकि ऐसा नहीं करते तो पूरे मानसून सत्र पर पानी फिर जाता। भाईसाहब, इसकी आड़ क्यों ले रहे हो। सेशन बुलाना आपके लिए बाएं हाथ का खेल है। अभी तीन महीने पहले 16,17 और 18 अप्रैले को ही आप स्पेशल सेशन बुलाकर तकरीबन इन्ही बिलों पर चर्चा करा चुके हो। तो फिर ऐसा क्या था कि मानसून सत्र के बाद दुनिया ही खत्म हो रही थी।
आने वाले यूपी, पंजाब चुनाव से घबरा गए
चौथा आपका पाइंट था कि कुछ महीनों बाद ही यूपी, पंजाब, उत्तराखंड में चुनाव होने जा रहे थे। इस आंदोलन की आग और फैलती तो इसकी सीधा असर इन चुनावों में भाजपा को भुगतना पड़ता। ऐसा किसान आंदोलन के बाद हुए यूपी चुनाव में भाजपा अपने हाथ झुलसा चुकी है। योगी जी 309 से सिमट कर 255 सीटों पर आ गए थे। लोकसभा मे भी 400 पार का पारा यूपी से ही पूरा नहीं कर पाई थी भाजपा। 62 से सीधे तकरीबन आधी 33 सीटों पर आ गए। यहां तक की अयोध्या भी हार गए थे।
ई 20 लेकर आ रहे हैं केजरीवाल
अब आप कुछ भी कहो, समझो या सफाई दो। तीर तो कमान से निकल चुका है। इस बीच केजरीवाल ने बोल ही दिया है कि वह ई 20 पर दिल्ली चढ़ाई की तैयारी कर रहा है। 1 अगस्त को उसने देश के लोगों से दिल्ली आने के आह्वान किया है।
ये दो उपाय उसकी नाभी में मारे सरकार, मिलियंस सिर वाले रावण का होगा खात्मा
भाईं, मझे तो नहीं लगता तुमसे हो पाएगा। क्योंकि जिसतरह से तुमने देश में आग लग जाएगी…आग लग जाएगी के डर से 5 साल पहले कथित किसान आंदोलन के सामने घुटनेे टेके थे और अब एलगोरिथम पर सवार इन तिलचट्टो के आगे टेक दिए। मामला मुश्किल ही है। तुम एक काम करो। हां, मोदी जी में आपसे ही कह रहा हूं। एक तो धरना-प्रदर्शन का स्थान जंतर-मंतर से बदलकर रामलीला मैदान या छत्रसाल स्टेडियम या बुराड़ी का खाली मैदान कर दो। दूसरा तुम जब भी आंदोलन हो सोशल साइट्स की एल्गोरिथम की कमान अपने हाथ में ले तो। आप एलगोरिथम बदल नेरेटिव बदल दोगे तो ये चिलगोजे और देश की जनता आपके साथ हो जाएगी। करना कुछ नहीं है। बस एलगोरिथम बदलना है। आपके पास जो रजिस्टर्ड 14 करोड़ वर्कर और अन्य संगठन हैं उनको कहे कि तुरंत सोशल मीडिया पर एक्टिव हो रील बनाएं। और अपना नेरेटिव और बात लोगों के सामने रखें। और आप मोदी जी इन सोशल मीडिया कंपनियों को टाइट करे। टाइट कैसे करना है वह आपको बता है। बताने की जरूरत नहीं है। नहीं ऐसा करोगे तो बंटाधार होना तय है। क्योंकि आपका सामना ऐसे रावण से है जिसके 10 सिर नहीं मिलियंस सिर हैं। जो पल-पल में अपना रंग बदलते हैं। कभी पैरों में लौट जाएंगे तो अगले ही पल आपकी गर्दन पर तलवार रखे देंगे।
