उदयपुर, 17 अप्रैल। किशोर-किशोरियों में गर्भधारण पूर्व पोषण सुधार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रीजनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (RCoE), उदयपुर द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से ट्राइबल क्षेत्र के हॉस्टल वार्डनों हेतु दो दिवसीय प्री-कांसेप्शन न्यूट्रिशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
यह कार्यक्रम पूर्व में एक वर्ष पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित किया गया था, जिसके अत्यंत सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए। इन्हीं सफल परिणामों को देखते हुए अब इस पहल को और अधिक सशक्त रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में अधीक्षक एमबीजीएच एवं समन्वयक आरसीओई डॉ. आर. एल. सुमन ने प्रतिभागियों को पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने “पोषण के पाँच सूत्र” पर विशेष जोर देते हुए निम्न बिंदुओं की जानकारी दी—
1.जीवन के पहले सुनहरे 1000 दिन का महत्व
2.संतुलित एवं पौष्टिक आहार का सेवन
3.एनीमिया की रोकथाम
4.डायरिया का समुचित प्रबंधन
5.स्वच्छता एवं साफ-सफाई का पालन
कार्यक्रम के दौरान हाथों की स्वच्छता हेतु “सुमन-के विधि” का प्रभावी प्रदर्शन भी किया गया, जिससे संक्रमण की रोकथाम के महत्व को व्यवहारिक रूप में समझाया गया।
डॉ. सुमन ने हॉस्टल वार्डनों को संबोधित करते हुए कहा कि वे नए विचारों और नवाचार के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।

उन्होंने बताया कि वार्डन किशोर-किशोरियों के पोषण स्तर को मजबूत कर उन्हें सुरक्षित मातृत्व की दिशा में अग्रसर कर सकती हैं।
इस पहल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्वस्थ किशोरियाँ भविष्य में स्वस्थ माताएँ बनें तथा स्वस्थ शिशुओं को जन्म दें। इससे लो बर्थ वेट एवं कुपोषित शिशुओं की संख्या में कमी आएगी और कुपोषण के दुष्चक्र को तोड़ने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम में रिटायर्ड होम साइंस विशेषज्ञ डॉ. मुकता अग्रवाल द्वारा हेल्दी डाइट के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वहीं आईवाईसीएफ समन्वयक कृष्णा गौतम ने एनीमिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमांशु, जिला समन्वयक मार्जरी, लेक्टेशन काउंसलर सीमा चौधरी, प्रकाश शर्मा, ब्लॉक समन्वयक पुष्पेंद्र, भूपेंद्र तथा आरसीओई से बी. एस. यादव एवं नरेन्द्र हरकावत उपस्थित रहे।
