- विद्या प्रचारिणी सभा के कार्यालय का किया औचक निरीक्षण
- पूर्व समिति के आनाकानी करने पर एडहॉक कमेटी ने संभाली पूरी जिम्मेदारी
उदयपुर, 1 जून। उदयपुर की भूपाल नोबल्स (BN) यूनिवर्सिटी में चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को इस मामले में उस समय नया मोड़ आ गया, जब विद्या प्रचारिणी सभा के प्रधान संरक्षक और अध्यक्ष विश्वराज सिंह मेवाड़ अचानक सुबह करीब 10 बजे सभा के कार्यालय (VP सभा ऑफिस) पहुंचे। उनके इस औचक निरीक्षण के बाद से ही यूनिवर्सिटी परिसर में हलचल काफी तेज हो गई है।
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2 घंटे तक चला निरीक्षण, ऑडिट से जुड़े दस्तावेज गायब
कार्यालय पहुंचे विश्वराज सिंह मेवाड़ ने करीब 2 घंटे तक रुककर वहां की एक-एक व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पूर्व कार्यसमिति के प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह से ऑडिट से जुड़े कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे।
दस्तावेज मांगे जाने पर प्रबंध निदेशक ने असमर्थता जताते हुए हाथ खड़े कर दिए। मोहब्बत सिंह का कहना था कि:
”इस समय ऑफिस में कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं है। सारे महत्वपूर्ण दस्तावेज पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह आगरिया के पास रखे हुए हैं।”
इसके बाद मोहब्बत सिंह ने पूर्व मंत्री आगरिया को फोन कर तुरंत ऑफिस बुलाने का प्रयास भी किया, लेकिन संपर्क साधे जाने के बावजूद पूर्व मंत्री कार्यालय नहीं पहुंचे।
अध्यक्ष ने अपनाया सख्त रुख, सोमवार शाम तक का दिया अल्टीमेटम
प्रबंध निदेशक की इस टालमटोल और लापरवाही को देखते हुए अध्यक्ष विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में निर्देश जारी करते हुए कहा कि ऑडिट के 62 मेमो का जवाब और उससे जुड़े जितने भी दस्तावेज हैं, उन्हें हर हाल में सोमवार शाम तक पेश किया जाए।
एडहॉक कमेटी ने हाथ में ली ऑफिस की कमान
अध्यक्ष की मौजूदगी में ही एडहॉक कमेटी ने एक्शन लेते हुए कार्यालय की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली। कमेटी के युवराज सिंह झाला ने वहां पहुंचकर तुरंत अपना कार्यभार संभाल लिया है। इस मौके पर विद्या प्रचारिणी सभा और ओल्ड बॉयज एसोसिएशन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और भारी संख्या में सदस्य भी मौजूद रहे।
आगे क्या हो सकता है? (संभावित परिणाम)
बड़ा वित्तीय खुलासा:
यदि सोमवार शाम तक 62 ऑडिट मेमो के दस्तावेज पेश नहीं किए जाते, तो अध्यक्ष विश्वराज सिंह मेवाड़ पूर्व समिति के खिलाफ गबन या वित्तीय धोखाधड़ी का बड़ा कानूनी मुकदमा दर्ज करवा सकते हैं।
पुलिसिया कार्रवाई में तेजी: चूंकि पूर्व समिति ने पहले ही भूपालपुरा थाने में परिवाद दे रखा है, इसलिए अब पुलिस इस मामले में दखल देकर पूर्व मंत्री के पास से दस्तावेज जब्त करने की कार्रवाई कर सकती है।
यूनिवर्सिटी के कामकाज पर असर: एडहॉक कमेटी द्वारा पूरी कमान संभालने के बाद यूनिवर्सिटी के दैनिक प्रशासनिक कार्यों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
