Monday, August 3, 2026
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मावली बालिका हत्या मामला: सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर कर, दोषी को फांसी बहाली की मांग

  • जांच और अभियोजन में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई
  • पीड़ित परिवार के सदस्य को संविदा पर नौकरी दी जाए

मावली, 3 अगस्त। मावली क्षेत्र में मार्च 2023 में 8 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा मुख्य आरोपी की मृत्युदंड की सजा को निरस्त कर आजीवन कारावास में बदलने के बाद किंग सेना मातृभूमि धर्म संघ ने मामले को उच्चतम न्यायालय दायर कर दोषी को फांसी की सजा बहाल करने की मांग की है।
किंग सेना मातृभूमि धर्म संघ के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष गगन सिंह राव ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजकर राज्य सरकार से इस मामले में उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की मांग की है। पत्र में मामले की जांच एवं अभियोजन प्रक्रिया में कथित रूप से हुई कमियों की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग भी की गई है।

पत्र के अनुसार, मामले में निचली अदालत के विशिष्ट पॉक्सो न्यायालय ने मुख्य आरोपी कमलेश सिंह को दुष्कर्म, पॉक्सो अधिनियम एवं हत्या के अपराधों में दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। हालांकि, हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरोपी को दुष्कर्म एवं पॉक्सो अधिनियम से संबंधित आरोपों से दोषमुक्त करते हुए मृत्युदंड की सजा निरस्त कर दी और हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी।

वैज्ञानिक साक्ष्यों और जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

गगन सिंह राव ने अपने पत्र में कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय में पुलिस जांच एवं अभियोजन से जुड़ी कई कमियों और प्रक्रियागत अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। पत्र में घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और फुटप्रिंट जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों के समुचित संकलन नहीं होने, कपड़ों एवं डीएनए से जुड़े साक्ष्यों के परीक्षण और मिलान में कथित कमियां रहने तथा जब्त वस्तुओं की सुरक्षित अभिरक्षा से संबंधित प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग

संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की जांच करने वाले अधिकारियों तथा संबंधित अभियोजन अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराई जाए। जांच में यदि किसी अधिकारी की ओर से साक्ष्य जुटाने, वैज्ञानिक जांच, साक्ष्यों की अभिरक्षा या न्यायालय में प्रभावी पैरवी के स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

पीड़ित परिवार के सदस्य को संविदा पर रोजगार देने की मांग

ज्ञापन में बताया गया कि बालिका के भाई को संविदा पर उदयपुर मुख्यालय पर नौकरी दी गई थी। लेकिन वह 4 महीने ही कर पाया। संगठन ने बालिका के भाई को उसकी योग्यता एवं सरकारी नियमों के अनुसार मावली उपखंड कार्यालय या नगर पालिका या पंचायत समिति कार्यालय या कृषि विभाग या पशुपालन विभाग किसी भी सरकारी विभाग में संविदा पर उपयुक्त रोजगार देने का आग्रह किया है।
ज्ञापन देने वालों में भज्जा राम डांगी, अमर चन्द डांगी, भगवान लाल भील, जमना लाल भील, उदय लाल भील, डुंगर सिंह,गुलाब सिंह, विनय खटीक, देवी सिंह गुजर ,हर्ष नासा , प्रकाश सालवी आदि उपस्थित थे।

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