मावली (उदयपुर)। मावली नगर पालिका के 20 वार्डों के चुनाव परिणाम सामने आ चुके हैं। आए नतीजों ने मावली की सियासी तस्वीर में सस्पेंस बढ़ा दिया है। 20 सीटों वाली इस नगर पालिका में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है। चुनाव परिणामों में कांग्रेस 10 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 9 सीटों पर सिमट गई है। वार्ड संख्या 16 से जीते एकमात्र निर्दलीय प्रत्याशी अब बोर्ड बनाने में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गए हैं।
नगर पालिका बोर्ड का गणित: कौन बनाएगा अध्यक्ष?
मावली नगर पालिका में चेयरमैन (अध्यक्ष) का पद हासिल करने के लिए 11 पार्षदों का जादुई आंकड़ा चाहिए:
- कांग्रेस (10 सीटें): बहुमत के आंकड़े से महज 1 सीट दूर है। कांग्रेस को अपना बोर्ड बनाने के लिए वार्ड 16 के निर्दलीय पार्षद के समर्थन की आवश्यकता है।
- भाजपा (9 सीटें): बहुमत से 2 सीटें पीछे है। भाजपा को अपना अध्यक्ष बनाने के लिए निर्दलीय पार्षद के साथ-साथ क्रॉस वोटिंग या विशेष रणनीति पर निर्भर रहना होगा।
नतीजे आते ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में बाड़ाबंदी और जोड़-तोड़ (होर्स ट्रेडिंग) का दौर शुरू हो गया है। निर्दलीय पार्षद को अपने पाले में लाने के लिए राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।
वार्ड-वार विजेता उम्मीदवारों की सूची (1 से 20 वार्ड)
- वार्ड 01: भाजपा
- वार्ड 02: भाजपा
- वार्ड 03: कांग्रेस
- वार्ड 04: कांग्रेस
- वार्ड 05: कांग्रेस
- वार्ड 06: भाजपा
- वार्ड 07: भाजपा
- वार्ड 08: कांग्रेस
- वार्ड 09: कांग्रेस
- वार्ड 10: कांग्रेस
- वार्ड 11: भाजपा
- वार्ड 12: भाजपा
- वार्ड 13: भाजपा
- वार्ड 14: भाजपा
- वार्ड 15: कांग्रेस
- वार्ड 16: निर्दलीय (किंगमेकर)
- वार्ड 17: कांग्रेस
- वार्ड 18: कांग्रेस
- वार्ड 19: कांग्रेस
- वार्ड 20: भाजपा
दलगत स्थिति एक नजर में
| पार्टी | जीती गई सीटें |
| कांग्रेस | 10 |
| भाजपा | 09 |
| निर्दलीय | 01 |
| कुल सीटें | 20 |
स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण अब सभी की नजरें निर्दलीय प्रत्याशी के रुख पर टिकी हैं। दोनों ही पार्टियों के दिग्गजों ने अपने-अपने जीते हुए प्रत्याशीयों की पकड़ के साथ ही निर्दलीय को अपने खेमे में लाने की तैयारी शुरू कर दी है। निर्दलीय के साथ ही भाजपा बहुमत के लिए 1 क्रासवोटिंग की जुगत में भी लग गई है। परिणाम अधिकारिक रूप से रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इन परिणाम में अब फेरबदल की संभावना नहीं के बराबर हैं।
