Saturday, September 19, 2026
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योगी जी का बुलडोजर क्या भाजपा पार्षद के होटल-घर पर चलेगा?

– फतहनगर-सनवाड़ में अध्यक्ष पद को लेकर सियासी घमासान, राजेश चपलोत की पत्नी निर्दलीय मैदान में; घर व होटल पर अवैध निर्माण का नोटिस

  • सीनियर रिपोर्टर- श्रीमती भगवती जोशी
  • फतहनगर-सनवाड़। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले फतहनगर-सनवाड़ की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। भाजपा के पार्षद राजेश चपलोत की पत्नी ममता चपलोत के निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने के बाद अब चपलोत परिवार संपत्ति पर उदयपुर विकास प्नाधिकरण (यूडीए) और फतहनगर-सनवाड़ नगर पालिका की ओर से जारी नोटिस चर्चा के विषय बन गये है।

25 वार्ड में भाजपा के 13, कांग्रेस के 12 पार्षद

फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका के 25 वार्डों के चुनाव परिणाम में भाजपा को 13 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली हैं। यानी भाजपा के पास बहुमत है। लेकिन अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला इसलिए दिलचस्प हो गया है क्योंकि अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित है और ममता चपलोत ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया है।

राजस्थान में 2019 में चुनाव नियमों में बदलाव के बाद निकाय अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार का निर्वाचित पार्षद होना अनिवार्य नहीं रहा। अध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित पार्षद करते हैं।

भाजपा पार्षद की पत्नी निर्दलीय मैदान में

राजेश चपलोत भाजपा के पार्षद हैं, लेकिन उनकी पत्नी ममता चपलोत के निर्दलीय मैदान में उतरने से भाजपा के सामने अपने ही पार्षद से जुड़ा राजनीतिक समीकरण खड़ा हो गया है। कांग्रेस के पास 12 पार्षद हैं। ऐसे में अध्यक्ष चुनाव में एक अतिरिक्त समर्थन भी पूरे समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि ममता चपलोत को कांग्रेस या किसी अन्य पार्षद का समर्थन मिलेगा या नहीं, यह चुनाव के दौरान ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच कांग्रेस की ओर से चैयरमेन पद की दावेदार महिला पार्षद सोसर ने अपना नाम वापिस ले लिया। चपलोत ने पत्नी को खड़ा नहीं किया होता तो फतहनगर-सनवाड़ से भाजपा पार्षद सीमा सोनी निर्विरोध चैयरमेन चुनी जाती और भाजपा यहां अपना बोर्ड बनाने में कामयाब होती।

तभी होटल पर पहुंचा नगर पालिका का नोटिस

इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राजेश चपलोत की ‘देवीलीला पैलेस’ संपत्ति पर नगर पालिका की ओर से नोटिस चस्पा किए जाने की खबर सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, नोटिस में अनुमोदित प्लान के विपरीत निर्माण और भू-उपयोग से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। नोटिस में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 194 और 245 का उल्लेख किया गया है।

नगरपालिका ने कथित तौर पर वर्तमान भू-उपयोग और निर्माण की स्वीकृति से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में आगे नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। ऐसा ही नोटिस यूडीए की ओर से उदयपुर शहर स्थित चपलोत के निवास पर रात में परिवार जनों को सौंपा गया।

क्या नोटिस महज प्रशासनिक कार्रवाई है या राजनीति से जुड़ा सवाल?

यहीं से पूरे मामले पर राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। चपलोत परिवार की ओर से नोटिस की प्रक्रिया और उसमें दर्ज तथ्यों पर आपत्ति जताए जाने की बात भी सामने आई है। एक स्थानीय रिपोर्ट में परिवार की ओर से नोटिस में तारीख और संपत्ति से संबंधित कुछ विसंगतियों का दावा किया गया है।

दूसरी तरफ नगर पालिका प्रशासन की कार्रवाई को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में इसे अवैध निर्माण और भू-उपयोग से संबंधित कार्रवाई बताया गया है। इसलिए फिलहाल यह कहना कि नोटिस राजनीतिक दबाव का परिणाम है, एक आरोप होगा; इसकी पुष्टि के लिए संबंधित प्रशासन और चपलोत परिवार दोनों का पक्ष जरूरी है।

शांतिलाल चपलोत के परिवार से जुड़ा है मामला

राजेश चपलोत का परिवार राजस्थान की राजनीति में भी पुराना राजनीतिक संबंध रखता है। राजेश चपलोत के चाचा शांतिलाल चपलोत राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में फतहनगर-सनवाड़ का यह स्थानीय चुनाव अब परिवार, पार्टी और नगर पालिका की राजनीति—तीनों स्तरों पर चर्चा में है।

अब असली सवाल अध्यक्ष चुनाव का

फतहनगर-सनवाड़ में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 25 पार्षदों के सदन में अध्यक्ष पद के लिए अंतिम समय तक कौन किसके साथ खड़ा होता है। भाजपा के पास 13 पार्षद हैं और कांग्रेस के पास 12। ऐसे में निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में बनने वाला कोई भी गठजोड़ चुनाव की तस्वीर बदल सकता है।

दूसरी ओर राजेश चपलोत की संपत्ति पर जारी नोटिस ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया है। क्या यह सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई है, या इसके पीछे राजनीतिक घटनाक्रम का भी कोई संबंध है? इसका जवाब संबंधित पक्षों और आगामी कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा।

फतहनगर-सनवाड़ की राजनीति में अब नजर अध्यक्ष पद के चुनाव पर है—क्योंकि यहां संख्या भले 13 बनाम 12 हो, लेकिन असली खेल समर्थन का है।

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