- स्कूल, कॉलेज फीस, बिजली-पानी-गैस का बिल पर कितना लगेगा
- बीमा, पेट्रोल, डीजल, सीएनजी पर कितना लगेगा
- शेयर मार्केट, म्यूच्यूअल फंड, डेली ट्रेडिंग पर कितना लगेगा
- व्यापारी एक्स्ट्रा पैसा वसूलता है तो 1915 पर कहां और कैसे शिकायत करें
- घनेन्द्र सिंह सरोहा
नई दिल्ली। एक महीने से ज्यादा की लुका-छिपी खेलने के बाद आज आखिरकरा सरकार सामने आ ही गई। यूपीआई पेमेंट 2000 से ऊपर क्या होगा। कैसे होगा। पैसा किसको देना होगा। आम जनता को भी देना होगा क्या। यह कब से लागू हो रहा है। इन्हीं सब सवालों के जवाब मैं प्वाइंट वाइज इस वीडियो में दूंगा। आप आखिर तक बने रहियेगा। क्योंकि इस वीडियो में स्कूल, कॉलेज की फीस, पानी, बिजली का बिल, मोटरसाइकिल, स्कूटी, कार में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी गैस, गैस का सिलेंडर, बीमा यहां तक की शेयर मार्केट में डेली ट्रेडिंग और म्यूच्यअल फंड में कितने इनंवेस्टमेंट पर कितना पैसा कटेगा। सब बताऊंगा। और पूरी जिम्मेदारी के साथ। और यह भी बताउंगा कि अगर कोई आपसे पैसा मांगे तो क्या करना है किससे शिकायत करनी है और इस 2000 के लफड़े से बचने का क्या तरीका है यह भी बताउंगा।
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा यूपीआई (P2M) लेन-देन पर संशोधित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की घोषणा की है। सरकार और NPCI ने स्पष्ट किया है कि आम ग्राहकों, व्यक्तिगत पैसों के लेन-देन (P2P) और ₹2,000 तक की दैनिक खरीदारी पर इसका 1 रुपये का भी प्रभाव नहीं पड़ेगा।
नए नियम के तहत छोटे व्यापारी (P2PM श्रेणी – जो महीने में ₹1 लाख तक का डिजिटल भुगतान प्राप्त करते हैं) और ₹2,000 तक अधिक लेन-देन पर शून्य (0%) एमडीआर जारी रहेगा। ₹2,000 से अधिक के व्यावसायिक लेन-देन पर 0.4% (अधिकतम ₹300 की सीमा के साथ) का मामूली शुल्क व्यापारियों पर लागू होगा। और यह सरकार ने यह क्यों किया है वह भी बता रहे हैं कि यह पूरा फैसला यूपीआई के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, मजबूत और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
प्रश्न 1. यह मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) अभी क्यों पेश किया जा रहा है?
उत्तर: यूपीआई हर महीने अरबों लेन-देन प्रोसेस करता है। एमडीआर से मिलने वाला राजस्व केवल यूपीआई इकोसिस्टम (बैंक और फिनटेक) में ही बांटा जाएगा, ताकि सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन, साइबर सुरक्षा और ग्राहक सेवा को मजबूत किया जा सके। क्रेडिट/डेबिट कार्ड की तुलना में यूपीआई एमडीआर काफी कम रखा गया है।
प्रश्न 2. क्या छोटे मूल्य के यूपीआई लेन-देन प्रभावित होंगे?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। ₹2,000 तक के छोटे लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जो कुल यूपीआई P2M लेन-देन का 95% से अधिक हिस्सा हैं।
प्रश्न 3. व्यापारियों पर यूपीआई लेन-देन पर कितना MDR लगाया जा रहा है?
उत्तर: ₹2,000 से अधिक के P2M यूपीआई लेन-देन पर 0.4% का एमडीआर लागू होगा। ₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन के लिए यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन पर सीमित (Capped) रहेगा।
प्रश्न 4. पारंपरिक डेबिट और क्रेडिट कार्ड एमडीआर से यूपीआई एमडीआर की तुलना कैसे होती है?
उत्तर: क्रेडिट कार्ड एमडीआर आमतौर पर 1.5% से 2.5% और डेबिट कार्ड एमडीआर 0.90% तक होता है। इसके विपरीत, यूपीआई का बेस एमडीआर 0.4% है और बड़े लेन-देन पर ₹300 की कैप है, जिससे यह सबसे किफायती माध्यम बनता है।
प्रश्न 5. संशोधित एमडीआर प्रावधान कब से लागू होंगे?
उत्तर: यह नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा। इससे बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर और बिलिंग सिस्टम अपडेट करने का समय मिल जाएगा।
प्रश्न 6. अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों की तुलना में भारत का मॉडल कैसा है?
उत्तर: अधिकांश वैश्विक भुगतान प्रणालियों में वाणिज्यिक मॉडल होते हैं जो अवसंरचना का खर्च उठाते हैं। भारत का दृष्टिकोण पहुंच, पैमाने और डिजिटल समावेशिता को प्राथमिकता देता है।
प्रश्न 7. एमडीआर कैप के कार्यान्वयन और प्रवर्तन का निर्णय कौन लेता है?
उत्तर: एनपीसीआई (NPCI) की अध्यक्षता वाली ‘यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ इन परिचालन मापदंडों और शुल्क वितरण मॉडल तय करती है।
प्रश्न 8. एमडीआर से प्रस्तावित छोटे व्यापारियों के लिए समर्पित फंड (Dedicated Fund) क्या है?
उत्तर: टियर 3 से टियर 6 शहरों, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने तथा पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं को समर्थन देने के लिए एक समर्पित फंड बनाया जाएगा।
प्रश्न 9. यह समर्पित फंड छोटे व्यापारियों की मदद कैसे करेगा?
उत्तर: यह फंड बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर्स को ग्रामीण और छोटे शहरों के छोटे दुकानदारों को यूपीआई से जोड़ने और उन्हें डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहन (Incentives) प्रदान करेगा। इसका विस्तृत ढांचा 3 महीने में आरबीआई की सलाह से तैयार होगा।
प्रश्न 10. केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना अब पर्याप्त क्यों नहीं है?
उत्तर: यूपीआई के वार्षिक संचालन, सर्वर बैंडविड्थ और साइबर सुरक्षा पर हर साल लगभग ₹20,000 करोड़ का खर्च आता है। केवल बजटीय सब्सिडी पर निर्भरता अनिश्चितता पैदा करती है, जबकि एक वाणिज्यिक ढांचा दीर्घकालिक तकनीकी निवेश सुनिश्चित करता है।
प्रश्न 11. इस कदम से पेमेंट ऐप ऑपरेटरों के बीच बाजार में प्रतिस्पर्धा कैसे बढ़ेगी?
उत्तर: ज़ीरो-एमडीआर व्यवस्था में केवल बड़े पूंजी वाले टेक दिग्गज ही घाटा सह सकते थे। एक निश्चित राजस्व मॉडल नए फिनटेक स्टार्टअप्स को भी समान अवसर प्रदान करेगा, जिससे बेहतर ऐप्स और सेवाएं मिलेंगी।
प्रश्न 12. यह नीति उभरते खतरों से साइबर सुरक्षा लचीलापन कैसे सुनिश्चित करती है?
उत्तर: एमडीआर से उत्पन्न राजस्व का उपयोग एआई-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, उन्नत एन्क्रिप्शन और मजबूत साइबर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में किया जाएगा।
प्रश्न 13. 2026 तक यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितना विस्तार हुआ है?
उत्तर: 2026 तक यूपीआई की सेवाएं दुनिया के 11 देशों में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
प्रश्न 14. वर्तमान में यूपीआई का लेन-देन पैमाना क्या है और इसे आत्मनिर्भर होना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: अकेले अगस्त 2026 में यूपीआई ने ₹29.9 लाख करोड़ मूल्य के 2,451 करोड़ लेन-देन प्रोसेस किए। इस विशाल पैमाने को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारी सर्वर और सुरक्षा ढांचा चाहिए, जिसके लिए आत्मनिर्भर फंड ढांचा जरूरी था।
भाग 2: सामान्य उपभोक्ता (General Consumer)
प्रश्न 15. क्या आम ग्राहकों से यूपीआई से भुगतान करने पर कोई शुल्क लिया जाएगा?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। ग्राहकों के लिए यूपीआई सेवाएं पहले की तरह पूरी तरह मुफ़्त रहेंगी।
प्रश्न 16. दोस्तों, परिवार या व्यक्तिगत संपर्कों को पैसे भेजने (P2P) पर कोई शुल्क है?
उत्तर: नहीं, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) और स्वयं के बैंक खातों के बीच फंड ट्रांसफर पूरी तरह मुफ़्त रहेगा।
प्रश्न 17. क्या यूपीआई ऐप भुगतान पर प्लेटफॉर्म फीस लेना शुरू करेंगे?
उत्तर: नहीं, यूपीआई ऐप प्रदाताओं को यूपीआई लेन-देन पर किसी भी प्रकार का प्लेटफॉर्म शुल्क या अन्य चार्ज लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है।
प्रश्न 18. यदि व्यापारी नामांकित शुल्क देना शुरू करते हैं, तो क्या दुकानों पर उपभोक्ता कीमतें बढ़ेंगी?
उत्तर: नहीं, एमडीआर दरें बहुत कम हैं और व्यापारी इसे परिचालन खर्च मानते हैं। बिक्री में बढ़ोतरी और कैश संभालने के जोखिम कम होने से दुकानदार कीमतें नहीं बढ़ाएंगे।
प्रश्न 19. क्या स्थानीय विक्रेता के पास क्यूआर कोड स्कैन करने पर शुल्क देना होगा?
उत्तर: नहीं, किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन करके भुगतान करना उपभोक्ता के लिए हमेशा 100% मुफ़्त रहेगा।
प्रश्न 20. क्या उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई लेन-देन की कोई मासिक सीमा है?
उत्तर: नहीं, उपभोक्ताओं के लिए मुफ़्त लेन-देन की कोई मासिक सीमा, कोटा या कैप नहीं है। (दैनिक सुरक्षा सीमाएं बैंक सुरक्षा के लिए होती हैं, कमर्शियल चार्ज के लिए नहीं)।
प्रश्न 21. आम नागरिक यूपीआई शुल्कों के संबंध में आधिकारिक अपडेट कहां देख सकते हैं?
उत्तर: नागरिक केवल वित्त मंत्रालय, आरबीआई (RBI), एनपीसीआई (NPCI) या पीआईबी (PIB) के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया की अफवाहों पर ध्यान न दें।
प्रश्न 22. क्या एमडीआर का ऑटो-डेबिट (AutoPay) जैसे यूटिलिटी बिल या ओटीटी/म्यूचुअल फंड सब्सक्रिप्शन पर असर पड़ेगा?
उत्तर: नहीं, यूपीआई ऑटोपे या बार-बार होने वाले स्वचालित भुगतान (Mandates) पर निर्धारित एमडीआर लेन-देन शुल्क लागू नहीं होता।
भाग 3: सूक्ष्म (P2PM) और छोटे व्यापारी
प्रश्न 23. क्या छोटे स्थानीय विक्रेताओं (P2PM) से यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लिया जाएगा?
उत्तर: नहीं। अपने बैंक खातों में प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे P2PM विक्रेताओं के लिए एमडीआर शून्य (0%) ही रहेगा।
प्रश्न 24. P2PM ढांचा क्या है और यह छोटे व्यापारियों की रक्षा कैसे करता है?
उत्तर: यह व्यक्तिगत खातों में पेमेंट लेने वाले रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों के लिए एनपीसीआई की विशेष खाता श्रेणी है, जो उन्हें किसी भी एमडीआर कटौती से पूरी तरह बचाती है।
प्रश्न 25. क्या छोटे व्यापारियों को अपने मौजूदा क्यूआर कोड या साउंडबॉक्स बदलने होंगे?
उत्तर: नहीं, दुकान पर लगे पुराने क्यूआर स्टैंड और साउंडबॉक्स बिना किसी रुकावट के पहले की तरह ही काम करते रहेंगे।
प्रश्न 26. यदि किसी छोटे व्यापारी को ₹2,000 से अधिक का भुगतान प्राप्त होता है तो क्या होगा?
उत्तर: यदि व्यापारी P2PM (छोटा व्यापारी) श्रेणी में है, तो उसे ₹2,000 से ऊपर का पेमेंट मिलने पर भी शून्य एमडीआर की छूट बनी रहेगी।
प्रश्न 27. छोटे व्यापारी फंड का विस्तृत ढांचा कब अंतिम रूप दिया जाएगा?
उत्तर: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के परामर्श से अगले 3 महीनों के भीतर इस फंड का विस्तृत परिचालन ढांचा तैयार कर लिया जाएगा।
प्रश्न 28. क्या शून्य एमडीआर का लाभ उठाने के लिए छोटे व्यापारी को जीएसटी (GST) पंजीकरण कराना अनिवार्य है?
उत्तर: नहीं, शून्य एमडीआर का लाभ उठाने के लिए जीएसटी पंजीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है।
प्रश्न 29. बैंक कैसे पहचानेंगे कि कौन सा छोटा व्यापारी (P2PM) शून्य एमडीआर का पात्र है?
उत्तर: बैंक मासिक लेन-देन सीमा (₹1 लाख/माह) पर नज़र रखेंगे। यदि लगातार 3 महीने तक किसी का यूपीआई कलेक्शन ₹1 लाख से अधिक रहता है, तो ही उसे नियमित P2M श्रेणी में स्थानांतरित किया जाएगा।
प्रश्न 30. क्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकृत क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होता है?
उत्तर: हां, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के सभी P2PM दुकानदारों को शून्य एमडीआर का पूरा लाभ मिलेगा।
भाग 4: बड़े व्यापारी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म
प्रश्न 31. बड़े व्यावसायिक लेन-देन पर कितना एमडीआर लागू होगा?
उत्तर: ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर 0.4% एमडीआर लगेगा, जबकि ₹75,000 से अधिक के लेन-देन पर अधिकतम ₹300 का कैप लगेगा। ₹2,000 तक के लेन-देन बड़े व्यापारियों के लिए भी मुफ़्त रहेंगे।
प्रश्न 32. क्या बहुत अधिक मूल्य वाले यूपीआई भुगतानों पर कोई अधिकतम शुल्क सीमा (Cap) है?
उत्तर: हां, ₹75,000 या उससे अधिक के किसी भी लेन-देन पर अधिकतम शुल्क ₹300 तय किया गया है। (उदा. ₹1,00,000 के भुगतान पर ₹400 के बजाय केवल ₹300 ही कटेंगे)।
प्रश्न 33. किन विशिष्ट श्रेणियों को प्रतिशत के बजाय फ्लैट एमडीआर का लाभ मिलता है?
उत्तर: रेलवे, टेलीकॉम सेवाएं, बीमा और ईंधन (पेट्रोल/डीजल) जैसी निर्दिष्ट श्रेणियों में ₹2,000 से ऊपर के लेन-देन पर प्रतिशत के बजाय मात्र ₹5 प्रति लेन-देन का फ्लैट एमडीआर लागू होगा।
प्रश्न 34. क्या बड़े व्यापारी ग्राहकों पर एमडीआर शुल्क डाल सकते हैं?
उत्तर: नहीं, कोई भी व्यापारी ग्राहक से एमडीआर का पैसा अतिरिक्त सरचार्ज के रूप में नहीं वसूल सकता।
प्रश्न 35. सटीक लेन-देन पर एमडीआर की गणना कैसे की जाती है?
उत्तर:
- ₹2,000 तक: ₹0 (मुफ़्त)
- ₹3,000 का बिल: ₹12 (0.4%)
- ₹50,000 का बिल: ₹200 (0.4%)
- ₹1,00,000 का बिल: ₹300 (अधिकतम कैप लागू)
प्रश्न 36. क्या यूपीआई से जुड़े क्रेडिट कार्ड या क्रेडिट लाइन के लेन-देन पर यह एमडीआर लागू होगा?
उत्तर: नहीं, रुपे क्रेडिट कार्ड या क्रेडिट लाइन से होने वाले यूपीआई भुगतान पर क्रेडिट कार्ड के अपने मानक नियम लागू होंगे। यह संशोधन केवल डायरेक्ट बैंक-टू-बैंक यूपीआई भुगतानों के लिए है।
भाग 5: कैपिटल मार्केट लेन-देन (म्यूचुअल फंड, शेयर)
प्रश्न 37. यूपीआई के माध्यम से कैपिटल मार्केट लेन-देन पर क्या एमडीआर दरें लागू होंगी?
उत्तर: म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, स्टॉकब्रोकर्स और डीलरों के लिए एमडीआर दर मात्र 0.02% रखी गई है, जिसमें अधिकतम कैप ₹300 है।
प्रश्न 38. कैपिटल मार्केट एमडीआर ढांचे के तहत कौन सी संस्थाएं और लेन-देन शामिल हैं?
उत्तर: इसमें सभी सेबी (SEBI) पंजीकृत स्टॉकब्रोकर, एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (Mutual Funds), और सिक्योरिटीज डीलर शामिल हैं।
भाग 6: विशेष क्षेत्र (Specialized Sectors)
प्रश्न 39. क्या बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) भुगतान पर विशेष छूट है?
उत्तर: हां, ₹2,000 से अधिक के बीमा प्रीमियम भुगतान पर प्रतिशत के बजाय मात्र ₹5 प्रति लेन-देन का फ्लैट एमडीआर लगेगा।
प्रश्न 40. पेट्रोल पंपों पर यूपीआई से ईंधन खरीद पर एमडीआर कैसे काम करता है?
उत्तर: पेट्रोल पंप पर ₹2,000 तक के ईंधन भुगतान पर 0% एमडीआर है। ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर पेट्रोल पंप संचालक को मात्र ₹5 का फ्लैट एमडीआर देना होगा।
प्रश्न 41. क्या सरकारी उपयोगिता बिल भुगतानों (बिजली, पानी) पर प्रतिशत एमडीआर लगेगा?
उत्तर: नहीं, बिजली, पानी और एलपीजी/गैस बिलों पर ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए ₹5 का फ्लैट एमडीआर तय किया गया है। ₹2,000 तक का बिल भुगतान मुफ़्त रहेगा।
प्रश्न 42. क्या शैक्षणिक संस्थानों को मानक एमडीआर प्रतिशत शुल्क से छूट प्राप्त है?
उत्तर: हां, स्कूल-कॉलेज की फीस और प्रवेश परीक्षाओं के लिए ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर फ्लैट/कैप्ड दरें लागू होंगी, जबकि ₹2,000 तक का भुगतान पूरी तरह मुफ़्त रहेगा।
कोई आपसे जबरदस्ती एक्स्ट्रा पैसा लेता है तो क्या करें
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI के स्पष्ट नियमों के अनुसार, कोई भी व्यापारी (चाहे छोटा हो या ₹50 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाला बड़ा व्यापारी) UPI या डेबिट कार्ड से भुगतान लेने पर ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क (सर्चार्ज या MDR) नहीं वसूल सकता। ऐसा करना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
दुकान पर तुरंत क्या करें
- अतिरिक्त राशि देने से मना करें: व्यापारी को स्पष्ट बताएं कि RBI के नियमों के तहत ग्राहक से MDR या स्वाइप चार्ज लेना प्रतिबंधित है।
- पक्का बिल मांगें: यदि व्यापारी फिर भी चार्ज वसूलता है, तो बिल पर अलग से “MDR / Convenience Charge” या एक्स्ट्रा चार्ज लिखवाएं और भुगतान की रसीद लें।
शिकायत कहाँ और कैसे करें
1. नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH)
- हेल्पलाइन नंबर: 1915 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं।
- ऑनलाइन पोर्टल / ऐप: consumerhelpline.gov.in पर जाएं या ‘NCH’ ऐप डाउनलोड करके ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
2. RBI शिकायत प्रबंधन प्रणाली (RBI CMS Portal)
- पोर्टल: cms.rbi.org.in पर जाएं।
- प्रक्रिया: “File a Complaint” पर क्लिक करें, अपने बैंक का नाम चुनें और ‘Merchant Levying Illegal Surcharge’ (व्यापारी द्वारा अवैध शुल्क वसूली) विकल्प का चयन करें।
3. पेमेंट ऐप और अपने बैंक में रिपोर्ट
- पेमेंट ऐप (PhonePe / Google Pay / Paytm): ट्रांजेक्शन हिस्ट्री में जाकर उस लेनदेन पर क्लिक करें और ‘Report Merchant’ या ‘Raise Dispute’ विकल्प चुनें।
- बैंक हेल्पलाइन: अपने कार्ड या बैंक के ग्राहक सेवा नंबर पर कॉल करके अवैध मर्चेंट सरचार्ज की शिकायत दर्ज कराएं।
4. NPCI पोर्टल पर शिकायत
- वेबसाइट: npci.org.in पर जाएं।
- प्रक्रिया: ‘Get in Touch’ विकल्प में ‘UPI Complaint’ चुनें और ट्रांजेक्शन विवरण के साथ व्यापारी की रिपोर्ट दर्ज करें।
शिकायत के लिए आवश्यक सबूत (Proof)
- दुकान/व्यापारी का नाम, पूरा पता और QR कोड या POS मशीन की फोटो।
- खरीदारी का मूल बिल (इन्वॉयस)।
- UPI या कार्ड भुगतान की रसीद/स्क्रीनशॉट जिसमें UTR / Transaction ID दर्ज हो।
दुकान पर बहस न करें, 10 सेकंड में ऐप से रिपोर्ट करें अगर कोई दुकानदार दबाव बनाकर ₹10-20 एक्स्ट्रा ले भी लेता है, तो वहां उलझने के बजाय शांत रहें और बाद में अपने फोन से यह काम करें:
- अपने PhonePe / Google Pay / Paytm ऐप में ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खोलें।
- उस भुगतान पर क्लिक करके ‘Report Merchant’ या ‘Issue with Payment’ चुनें।
- विकल्प में “Merchant charging extra surcharge” सेलेक्ट करके सबमिट कर दें। यह रिपोर्ट सीधे बैंक और NPCI के पास जाती है और लगातार ऐसी रिपोर्ट्स मिलने पर उस व्यापारी का क्यूआर कोड या POS अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता है।
3. कार्ड स्वाइप की जगह ‘Scan & Pay’ (UPI QR) अपनाएं पेट्रोल पंपों या किराना दुकानों पर स्वाइप मशीन (POS) का इस्तेमाल करने पर ही व्यापारी अमूमन सरचार्ज या कार्ड चार्ज का बहाना बनाते हैं। टेबल पर रखे स्कैनर (QR Code) से पेमेंट करने पर न तो फ्यूल सरचार्ज लगता है और न ही कोई एक्स्ट्रा चार्ज मांगने की हिम्मत करता है।
4. 1915 नंबर पर केवल एक व्हाट्सएप मैसेज अगर कोई व्यापारी बहुत बड़ा फ्रॉड कर रहा है या पक्का बिल देने से सरासर मना कर रहा है, तो नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के व्हाट्सएप नंबर (8800001915) पर केवल दुकान का नाम और शहर लिखकर मैसेज छोड़ दें। कोई फॉर्म भरने या दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होती।
एनपीसीआई के अनुसार, यूपीआई के भारी-भरकम नेटवर्क को सुरक्षित चलाने, सर्वर क्षमता बढ़ाने और साइबर फ्रॉड रोकने पर सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ का खर्च आता है। केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहने के बजाय इस नए कमर्शियल मॉडल से मिलने वाले राजस्व का उपयोग साइबर सुरक्षा मजबूत करने, नए फिनटेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और ग्रामीण/छोटे शहरों (टियर-3 से टियर-6) में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए बनाए जाने वाले ‘स्मॉल मर्चेंट फंड’ में किया जाएगा।
