- 16 साल तक के किशोरों के सोशल मीडिया उपयोग पर लगे प्रतिबंध
- घनेन्द्र सिंह सरोहा
नई दिल्ली, 30 जुलाई 2026. फेसबुक, इंस्टाग्राम, वाट्स ऐप चलाने वाली मेटा कंपनी ने एक बार फिर देश के साथ जुर्रत की है। इस बार उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हिमाकत की है। उनका पहला सेल्फी वीडियो ही हटा दिया। यह वही वीडियो है जिसकी रीच 24 घंटे के भीतर 300 मिलियन यानि 30 करोड़ से ज्यादा हो गई थी। हटाने पर मेटा ने कहा कि तकनीकि कारण से ऐसा हुआ। चाइल्ड पोर्नोग्राफी के वीडियो मेटा से बहुत ही…बहुत ही ज्यादा मुश्किल से हटते हैं। लेकिन सीजपी आंदोलन के समय देश की जेन जी को संबोधित करने वाला वीडियो तुरंत हट गया।
मेटा ने देश के कानून का माखौल पहली बार नहीं उ़ड़ाया है। वह समय-समय पर ऐसा करता आया है। 2021 में जब उसने अपनी मर्जी से इंस्टा का डेटा फेसबुक को शेयर करना शुरू कर दिया तो कंपटिशन कमिशिन ऑफ इंडिया ने उसपर 213 करोड़ रु. का जुर्माना लगाया। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
मेटा पर सत्ता विरोधी वीडियोज को प्रमोट करने का आरोप
अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में….सरकार मेटा से सबसे पहले सूचना जारी करने वाले की इनफोर्मेशन मांग रही है। लेकिन बिजनेस के उसूलों की आ़ड़ में मेटा यह सूचना उपलब्ध कराने से इनकार कर रहा है। मामला दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे ही शाहीन बाग CAA, NRC या किसान आंदोलन और अब सीजेपी आंदोलन…. मेटा पर आरोप है कि उसने मौजूदा मोदी सरकार के खिलाफ वीडियोज को ज्यादा तवज्जो देकर देश में सत्तारूढ़ मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाया। और ऐसा हो भी रहा है। अभी हाल ही में सीजेपी आंदोलन में मेटा के सभी प्लेटफार्म पर सरकार विरोधी वीडियो की बाढ़ आ गई। सरकार व उसके समर्थकों के वीडियोज को कुछ ही प्रतिशत जगह मिली। और हद तो अब हो गई जब मेटा ने तकीनीकी गड़बड़ी की आड़ लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ही वीडियो रोक दिया।
इन सबके क्या मायने हैं। क्या यह सब यूं ही चलता रहेगा। सोशल मीडिया …खासतौर पर इंस्टा, फेसबुक, एक्स, यूट्यूब आदि बिना किसी जवाबदेही के देश की राजनीति …..और सामाजिक ढांचे की दशा-दिशा अपने हिसाब से बदल रहे हैं। इन कंपनियों के नाम मात्र के प्रतिनिधि और ऑफिस भारत में है। वह भी तब खुले जब हाल ही में इस बात का हल्ला मचा। लेकिन यह कार्यालय भी सिर्फ दिखाने के लिए है। आम-आदमी तो छोड़ो प्रधानमंत्री कार्यालय तक को भी इनसे संपर्क करना हो तो मेल करना पड़ता है। सरकार इनके प्रतिनिधि से जैसे-तैसे बात भी कर ले तो एक ही रटा-रटाया जवाब होता है। तकनीकि गड़बड़ी की। क्या तकनीकि गड़बड़ी हई। उसकी रिपोर्ट ना कभी सरकार को दी है और ना ही देते दिखाई देते हैं।
मैसेज जेनरेट किसने किया, यह बताने में मेटा को क्या है दिक्कत- जांच एजेन्सियां
हकीकत यह है कि ये कंपनियां हमारे देश से हर साल हजारों करोड़ की कमाई कर हमारे देश के कानूनों की ही पालना नहीं कर रहीं हैं…. उन्हें जैसा-चाहे मरोड़ रही हैं। सरकार कुछ पूछे तो सीधे अदालत पहुंच जाती हैं। फिर हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट। बस मामला खींचता रहता है। होता कुछ नहीं है। अब आप खुद ही देख लीजिए। मान लीजिए आपकी 18 साल की बच्ची को किसी ने या किसी ग्रुप ने गलत वाट्स अप मैसेज भेजा है। या किसी साइबर ठग ने वाट्स अप या फेसबुक या इंस्टा पर मैसेज कर आपके साथ ठगी की है। तो अंतिम आरोपी तक पहुंचने या इस षड़यंत्र का सबसे पहला मैसेज कहां जनरेट हुआ यह जानकारी मेटा कंपनी जांच एजेंसी को नहीं बताएगी। कहेगी कि यह हमारे धंधे के खिलाफ है।
टिक टॉक, पबजी जैसे 300 से ज्यादा चाइनीच एप बंद कर चुकी है सरकार
तो फिर सवाल उठता है कि सरकार क्या करे। इन सबको बंद कर दे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सरकार को मेटा से बीते साल करीब 6 हजार करोड़ रुपये की आय हुई। इंस्टाग्राम, फेसबुक के देश में करीब 40 करोड़ सब्सक्राइबर हैं। वाट्सअप के 60 करोड़ यूजर हैं। आमदनी को सरकार छोड़ सकती है। यह कोई बहुत बड़ी रकम नहीं है। सरकार इससे पहले भी चीनी एप टिकटॉक, पबजी, वीचैट जैसे 300 से ज्यादा ऐप को बंद कर चुकी है। इसलिए इनको भारत से भगाने में सरकार को कोई ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। बात जनता की है। जो इनकी एडिक्ट हो चुकी है। तो उसके लिए सरकार को भारतीयों द्वरा बनाए गए सोशल मीडिया एप्स को प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही चीन, रूस, दक्षिण कोरिया जैसे लोकल सर्च इंजन को प्रमोट करना चाहिए।
क्या 16 साल से छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म के उपयोग पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए
साथ ही आस्ट्रेलिया, फ्रांस जैसे देशों की तरह 16 साल से छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म के उपयोग पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। ताकि विदेशी और घरेलु ताकते हमारे देश की जैन एल्फा और आने वाली जैन बीटा नस्लों को बरगलाना बंद करे। नहीं तो बहुत देर हो जाएगी। हालांकि हम पहले से ही बहुत पीछे हैं। बीते 15 साल में देश में राजीनितक, अलगाववादी, धार्मिक और सामाजिक उथल-पुथल के पीछे इन सोशल मीडिया प्लेटफार्म का बहुत बड़ा हाथ है।
अपने बच्चों को बुरी संगत से बचाने के लिए मोदी सरकार को जल्द ही बड़े कदम उठाने होंगे। पहले तो बुरी संगत पड़ोस, मौहल्ले और स्कूलों में ही होती थी लेकिन अब यह बिना जवाबदेही वाले सोशल मीडिया प्लेटफार्म की मार्फत हो रही है। और पेरंट्स और देश चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा है।
