Sunday, October 4, 2026
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HomenationalGST में गिरफ्तारी के अधिकार को हटाने की तैयारी

GST में गिरफ्तारी के अधिकार को हटाने की तैयारी

  • कर अधिकारियों की अति-सक्रियता (overreach) पर चिंताओं को दूर करने की पहल
  • जीएसटी परिषद 7 अक्टूबर को करेगी इस मुद्दे पर चर्चा, सरकार शीतकालीन सत्र में ला सकती है संशोधन

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर। जुलाई 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के नौ साल से अधिक समय बाद, इसमें एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है—जीएसटी व्यवस्था के तहत गिरफ्तारी के अधिकारों को समाप्त किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार निवेशकों की भावनाओं को बढ़ावा देने और कर अधिकारियों की अत्यधिक दखलंदाजी (overreach) को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए, 7 अक्टूबर को होने वाली आगामी जीएसटी परिषद की बैठक में अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के तहत अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर (decriminalise) करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।

केंद्र और राज्यों के बीच पिछले आठ-नौ महीनों में कई दौर की बैठकें हुई हैं, जिसमें केंद्रीय सरकार के शीर्ष स्तर के अधिकारियों की भागीदारी भी शामिल है। इसके जरिए जीएसटी के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाने पर एक व्यापक आम सहमति बन गई है, जिसे व्यापारियों और व्यवसायों के लिए एक बड़ी बाधा के रूप में देखा जा रहा था। इस कदम को तात्कालिक रूप से जरूरी माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में जीएसटी प्रावधानों के तहत कई शीर्ष अधिकारियों/कारोबारियों की गिरफ्तारियां की गई थीं, जिन्हें उद्योग जगत के नेताओं ने ‘अति-सक्रियता’ (overreach) करार दिया था।

एक सूत्र ने बताया कि जीएसटी के तहत जानबूझकर की जाने वाली धोखाधड़ी और छल के मामलों में अधिकारी अब अभियोजन (prosecution) की कार्रवाई करेंगे और गिरफ्तारियां देश के आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita)—के माध्यम से होंगी।

एक सूत्र ने कहा, “पिछले आठ-नौ महीनों से बातचीत चल रही है। इस चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए व्यवसायों से गिरफ्तारियों को लेकर मिले फीडबैक को ध्यान में रखा गया है। जीएसटी परिषद इस मामले पर विचार करेगी और उसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिसके बाद जीएसटी कानूनों के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाने के लिए विधायी बदलाव किए जाएंगे।”

धोखाधड़ी के तरीके और आंकड़े

जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से, अधिकारियों को कई तरह की धोखाधड़ी के मामलों से निपटना पड़ा है, जिनमें लगभग एक जैसी कार्यप्रणाली (modus operandi) अपनाई गई थी। आमतौर पर ऐसे मामलों में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने के लिए फर्जी पहचान या म्युल अकाउंट्स (mule accounts) के जरिए फर्जी जीएसटी लेनदेन किए जाते हैं, या फिर बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के फर्जी बिल बनाए जाते हैं। कई आपूर्तिकर्ता अपने अंतिम सामान के मूल्य को कम दिखाते हैं और कम दरों पर कच्चे माल की खरीद दिखाते हैं। इसके अलावा, वे केंद्र और राज्य सरकारों को उचित जीएसटी भुगतान किए बिना कर योग्य सामान और सेवाएं भी बेच देते हैं।

वर्ष 2021-22 से 2024-25 के दौरान जीएसटी अपराधों के 72,393 मामलों में केंद्रीय जीएसटी फॉर्मेशन द्वारा 887 गिरफ्तारियां की गईं। राज्य अधिकारियों द्वारा की गई गिरफ्तारियां इस संख्या के अतिरिक्त हैं।

कानूनी प्रावधान और धारा 69

केंद्रीय जीएसटी अधिनियम के तहत, नियमों का पालन न करने पर धारा 122 के तहत जुर्माना, धारा 50 के तहत ब्याज और कर की वसूली हो सकती है। हालांकि, कर चोरी के जानबूझकर किए गए इरादे वाले उल्लंघनों के तहत सीजीएसटी अधिनियम के आपराधिक प्रावधानों के तहत गिरफ्तारी और अभियोजन की कार्रवाई की जाती है।

सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 कमिश्नर की मंजूरी के बाद गिरफ्तारी की शक्ति प्रदान करती है। इसकी उप-धारा (1) के अनुसार, यदि कमिश्नर के पास “यह विश्वास करने का कारण” है कि किसी व्यक्ति ने फर्जी चालान या फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ा कोई अपराध किया है, तो वह आदेश देकर किसी भी केंद्रीय कर अधिकारी को ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत कर सकता है। ये “विश्वास करने के कारण” पुख्ता सामग्री और साक्ष्य पर आधारित होने चाहिए, और केवल संदेह पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सभी कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना अनिवार्य है।

सूत्रों के अनुसार, बुधवार को होने वाली 7वीं जीएसटी परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद, केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाने के लिए एक संशोधन लाने की उम्मीद है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और पुरानी बहस

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि गिरफ्तारियां उत्पीड़न का एक हथियार बन गई थीं, विशेष रूप से बैंकिंग और बीमा सहित सेवा क्षेत्र में, और व्यवसायों के लिए लंबे समय तक कानूनी लड़ाइयों से बचने हेतु पेनल्टी चुकाने के लिए अक्सर इन्हें सौदेबाजी के उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। एक अधिकारी ने कहा कि गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाना एक करदाता-अनुकूल कदम होगा और इससे डर तथा उत्पीड़न की किसी भी धारणा को खत्म किया जा सकेगा।

जीएसटी कानूनों के तहत गिरफ्तारी की शक्तियों को लेकर चिंता कोई नई बात नहीं है। अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के 2017 में लागू होने से पहले भी, जीएसटी परिषद की शुरुआती बैठकों में कई राज्यों ने इसे उठाया था।

दिसंबर 2016 में आयोजित पांचवीं जीएसटी परिषद की बैठक के मिनट्स के अनुसार, महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा था कि गिरफ्तारी और जब्ती (confiscation) की शक्ति ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने में सुगमता) की अवधारणा के अनुकूल नहीं है। पश्चिम बंगाल के एक मंत्री ने कहा था कि वैट (VAT) कानून के तहत गिरफ्तारी की कोई शक्ति नहीं थी और एफआईआर (FIR) केवल पुलिस के पास दर्ज की जा सकती है, इसलिए कर प्राधिकरण को ऐसी शक्तियां देना विवेकपूर्ण नहीं हो सकता है।

वैट (VAT) की यादें

यदि गिरफ्तारी की शक्ति को हटा दिया जाता है, तो जीएसटी व्यवस्था, एक तरह से, जुलाई 2017 में अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू होने से पहले मौजूद वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) व्यवस्था के समान हो जाएगी, जिसमें गिरफ्तारी का कोई प्रावधान नहीं था।

जीएसटी परिषद के कमिश्नर ने पहले कहा था कि जीएसटी के तहत गिरफ्तारी का प्रावधान बेहद प्रतिबंधित था और इस शक्ति का उपयोग केवल उन्हीं मामलों में किया जा सकता था जहाँ संयुक्त कर चोरी 2 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो और अपराध बहुत गंभीर हो—जैसे बिना किसी चालान के माल की आपूर्ति करना; बिना किसी आपूर्ति के चालान जारी करना; कर संग्रह किया लेकिन सरकार को भुगतान नहीं किया; जीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन में कर संग्रह किया लेकिन सरकार को भुगतान नहीं किया; और बिना वस्तुएं व सेवाएं प्राप्त किए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के एक आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया है कि कराधान के प्रशासन में, गिरफ्तारी के प्रावधान कुछ बेईमान कर चोरों द्वारा उत्पन्न स्थितियों से निपटने के लिए बनाए गए हैं।

इसमें कहा गया है, “कुछ लोगों को यह बहुत कठोर लग सकता है, लेकिन कुशल कर प्रशासन के लिए ये आवश्यक हैं और यह एक निवारक (deterrent) के रूप में भी काम करते हैं तथा अनुशासन की भावना पैदा करते हैं। जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों में पर्याप्त अंतर्निहित सुरक्षा उपाय (inbuilt safeguards) हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनका उपयोग केवल कमिश्नर के प्राधिकरण के तहत ही किया जाए। इसके अलावा, जीएसटी कानून यह भी निर्धारित करता है कि गिरफ्तारियां केवल उन्हीं मामलों में की जा सकती हैं जहाँ व्यक्ति गिरफ्तारी के लिए निर्दिष्ट अपराधों में शामिल हो और ऐसे अपराध में शामिल कर की राशि निर्धारित सीमा से अधिक हो।”

सरकार प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर भी अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर (decriminalising) करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने सितंबर में कर चूककर्ता के मामले में कर अधिकारियों को गिरफ्तारी करने से रोकते हुए, 1 अप्रैल, 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव से कर वसूली नियमों से गिरफ्तारी और हिरासत के प्रावधानों को हटा दिया था। 17 सितंबर की एक अधिसूचना में, सीबीडीटी ने आयकर (चौथा संशोधन) नियम, 2026 पेश किया था, जो चूककर्ता की मृत्यु के मामले में कर वसूली नियमों से “गिरफ्तारी और हिरासत” को भी हटा देता है।

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