- सीनियर रिपोर्टर- श्रीमती भगवती जोशी
फतहनगर-सनवाड़। अक्सर चुनाव के दौरान कई लोग यह सोचकर मतदान करने नहीं जाते कि “मेरे एक वोट न देने से क्या ही फर्क पड़ जाएगा?” लेकिन राजस्थान के उदयपुर जिले की फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका चुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में 1 वोट की कीमत क्या होती है।
यहाँ मात्र 1 वोट के अंतर ने न सिर्फ एक प्रत्याशी की किस्मत का फैसला किया, बल्कि पूरी नगरपालिका के बोर्ड की तस्वीर ही बदलकर रख दी।
25 सीटों का गणित और 1 वोट का खेल
25 सीटों वाली फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 13 सीटें और कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं। भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ अपना बोर्ड बनाने जा रही है, लेकिन इस बहुमत के पीछे की कहानी बेहद हैरान करने वाली है। भाजपा ने जिस निर्णायक 13वीं सीट पर जीत हासिल की, वह जीत केवल 1 वोट के अंतर से दर्ज की गई है।
वार्ड नंबर 1 का हाई-वोल्टेज ड्रामा
पूरा घटनाक्रम नगरपालिका के वार्ड नंबर 1 से जुड़ा है, जहाँ मुकाबला सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच था:
- प्रकाश पूरी (भाजपा): 212 वोट (विजयी)
- नरेश जाट (कांग्रेस): 211 वोट
भाजपा प्रत्याशी प्रकाश पूरी ने कांग्रेस के नरेश जाट को मात्र 1 वोट से पराजित किया। अगर यह 1 वोट कांग्रेस के पक्ष में गिरता, तो स्थिति बराबरी (12-12) पर आ सकती थी। लेकिन इस 1 वोट की कमी के कारण नरेश जाट चुनाव हार गए और पूरी कांग्रेस पार्टी को नगरपालिका बोर्ड से हाथ धोना पड़ा।
‘कर्मा’ का चक्र: 6 साल बाद वही दर्द
इस नतीजे में सबसे ताज्जुब की बात यह रही कि इसे राजनीति में ‘कर्मा का चक्र’ माना जा रहा है। दरअसल, पिछले नगरपालिका चुनाव में इसी वार्ड नंबर 1 से नरेश जाट खुद मात्र 1 वोट से जीतकर पार्षद बने थे। जिस दर्द को भाजपा प्रत्याशी पिछले 6 सालों से महसूस कर रहे थे, ठीक 6 साल बाद कर्मा ने घूमकर वही दर्द 1 वोट के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी को वापस दे दिया।
जब 1 वोट ने बदल दिया देश और प्रदेश का इतिहास
राजनीति में 1 वोट के कारण इतिहास बदलने का यह पहला मामला नहीं है। अतीत में भी 1 वोट ने बड़े-बड़े राजनीतिक समीकरण बिगाड़े हैं:
- 2008 का राजस्थान विधानसभा चुनाव: नाथद्वारा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ. सीपी जोशी को भाजपा के कल्याण सिंह चौहान ने मात्र 1 वोट से हराया था। इस 1 वोट की हार के कारण डॉ. सीपी जोशी राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने से चूक गए थे।
- 1999 का लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव: देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 13 महीने पुरानी केंद्र सरकार संसद में मात्र 1 वोट से गिर गई थी।
फतहनगर-सनवाड़ का यह फैसला हर नागरिक के लिए एक बड़ा सबक है कि चुनाव में हर एक वोट की कीमत निर्णायक होती है।
