जिस अभियान का नाम ‘वंदे गंगा’ जैसी पवित्रता से जुड़ा हो, उसकी जमीनी हकीकत कितनी शर्मनाक
सीनियर रिपोर्टर- श्रीमती भगवती जोशी
फतहनगर 6जून। पूरे राजस्थान में जल स्रोतों के उद्धार के लिए ढोल-नगाड़ों के साथ ‘वन्दे गंगा जल संरक्षण अभियान’ चलाया जा रहा है। कागजों में बड़े-बड़े दावे हैं कि जल स्रोतों की सूरत बदल रही है। लेकिन जब हमारी नेताजी का रिपोर्ट कार्ड’ की टीम ने फतेहनगर-सनवाड़ नगर पालिका क्षेत्र के मुख्य तालाब पर ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हकीकत देखी, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। यहाँ अभियान के नाम पर सिर्फ एक ही चीज साफ हुई है—और वो है नगर पालिका में आया हुआ सरकारी ‘बजट’!
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तस्वीरें खोल रही हैं दावों की पोल: झाड़ू से महरूम, कंटीली झाड़ियों और कचरे का साम्राज्य*
तालाब की जो तस्वीरें- वीडियो सामने आई हैं, वे स्थानीय प्रशासन के मुंह पर करारा तमाचा हैं। जैसा कि वीडियो में साफ देखा जा सकता है, तालाब के पूरे घाट और सीढ़ियां सूखी कंटीली झाड़ियों, खरपतवार और बिखरे हुए प्लास्टिक-मलबे से पटी पड़ी हैं। सफाई अभियान की ‘झाड़ू’ इन सीढ़ियों तक पहुँचना तो दूर, यहाँ सालों से किसी जिम्मेदार अधिकारी ने कदम तक नहीं रखा है।

पवित्र अभियान के बीच सीढ़ियों पर कांच के टुकड़े और बीयर के रैपर!
जिस अभियान का नाम ‘वंदे गंगा’ जैसी पवित्रता से जुड़ा हो, उसकी जमीनी हकीकत कितनी शर्मनाक है, यह बयां कर रही है। तालाब की सीढ़ियों पर सरेआम शराब और बीयर की बोतलों के टूटे हुए कांच, ढक्कन और ‘किंगफिशर’ के रैपर बिखरे पड़े हैं। धार्मिक और सामाजिक महत्व रखने वाले इस जल स्रोत को असामाजिक तत्वों का अड्डा बनने के लिए लावारिस छोड़ दिया गया है।
पानी हुआ ‘जहरीला’, तैर रही है पूजा सामग्री और प्लास्टिक*
तालाब के पानी की स्थिति तो और भी बदतर है। वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि पानी पूरी तरह से हरा और दूषित हो चुका है। किनारे पर सड़े हुए फूलों की मालाएं, मिट्टी के दीये, प्लास्टिक की थैलियां और घरेलू कचरा तैर रहा है। जल संरक्षण के नाम पर केवल फोटो खिंचवाने वाले नेताओं और अधिकारियों के दावों को यह तैरता हुआ कचरा पूरी तरह खारिज करता है।

जनता देख रही है ‘कागजी’ सफाई का खेल*
स्थानीय प्रशासन ने अभियान के नाम पर वाहवाही लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन धरातल पर फतेहनगर का यह ऐतिहासिक तालाब आज भी प्रशासन की ‘झाड़ू’ से पूरी तरह वंचित है। अब देखना यह है कि इन तस्वीरों के माध्यम से जनता के सामने आई इस तीखी सच्चाई के बाद भी नगर पालिका प्रशासन कुंभकरणी नींद से जागता है या फिर ‘बजट ठिकाने लगाने’ का यह खेल ऐसे ही बदस्तूर जारी रहेगा।

