- वर्ष 2007 के पुराने नियम समाप्त, 14 गैर-कृषि कार्यों के लिए मिलेगी सुविधा
उदयपुर/जयपुर, 6 नवंबर। राजस्थान में कृषि भूमि रूपांतरण की प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए 2 नवंबर 2026 से नए नियम लागू कर दिए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2007 से चले आ रहे पुराने नियमों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत अब 14 प्रकार के गैर-कृषि कार्यों के लिए भूमि रूपांतरण की सुविधा दी गई है। सभी प्रकार के भूमि रूपांतरण की स्वीकृति के लिए उपखंड अधिकारी (SDO) को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किया गया है।
आवेदन के दिन ही ऑनलाइन अनुमति, 30वें दिन राजस्व रिकॉर्ड में स्वतः बदलाव
भूमि रूपांतरण की पूरी प्रक्रिया को आवेदन से लेकर अनुमति तक समयबद्ध और ऑनलाइन कर दिया गया है। अब आवेदक को घर बैठे ही आवेदन करने पर उसी दिन ऑनलाइन मंजूरी जारी की जाएगी। सिस्टम में प्रीमियम राशि की गणना कंप्यूटर द्वारा पारदर्शी तरीके से की जाएगी। प्रक्रिया शुल्क के रूप में आवासीय उपयोग के लिए ₹2,000 तथा अन्य सभी प्रयोजनों के लिए ₹20,000 निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, रूपांतरण के 30वें दिन राजस्व रिकॉर्ड में स्वतः ही बदलाव दर्ज हो जाएगा।
विभिन्न कार्यों के लिए तय हुईं प्रीमियम दरें, छोटे आवास और पशुशाला पर छूट
सरकार द्वारा रूपांतरण के लिए श्रेणीवार प्रीमियम दरें निर्धारित की गई हैं:
छूट: 500 वर्गमीटर तक स्वयं के आवास एवं पशुशाला निर्माण पर पूर्ण छूट प्रदान की गई है।
- आवासीय उपयोग: 5% प्रीमियम दर।
- व्यावसायिक एवं औद्योगिक: 10% प्रीमियम दर।
- खाद्य प्रसंस्करण: 2.5% प्रीमियम दर।
- सौर एवं पवन ऊर्जा: मात्र 0.5% प्रीमियम दर।
गलत जानकारी और बिना अनुमति उपयोग पर भारी जुर्माना, अपील का भी विकल्प
नए नियमों में नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी व वित्तीय कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। आवेदन में गलत जानकारी देने पर दोगुना प्रीमियम जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, बिना अनुमति के भूमि का गैर-कृषि उपयोग करने पर 4 गुना जुर्माना वसूला जाएगा। यदि किसी मामले में विवाद या असंतोष हो, तो 30 दिनों के भीतर जिला कलेक्टर के समक्ष अपील दायर की जा सकती है।
इन जमीनों के रूपांतरण पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध
सार्वजनिक और पर्यावरणीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कुछ विशेष श्रेणियों की जमीनों के रूपांतरण पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। नदी-नाले, तालाब, जलस्रोत, श्मशान, कब्रिस्तान एवं अन्य सभी प्रकार के प्रतिबंधित क्षेत्रों की भूमि का रूपांतरण किसी भी स्थिति में नहीं किया जा सकेगा।
